- आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की पहल
रायपुर (विश्व परिवार)। ग्राम पंचायत मांढर मेंपरियोजना ‘चहचहाट’के अंतर्गत हरेली पक्षी महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में Bird Walk एवं Bird Count का आयोजन किया गया, जिसमेंकलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंहतथाजिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार विश्वरंजनके साथ ग्रामीणों, बच्चों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने तालाब एवं आसपास के क्षेत्र में पक्षियों का अवलोकन किया तथा उनकी पहचान एवं उपस्थिति दर्ज की।
कार्यक्रमग्राम पंचायत मांढर की सरपंच कुमारी आडिल के नेतृत्व में, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष केशरवानी के मार्गदर्शनतथा जिला स्तर सेसुमित जी के समन्वय एवं सहयोगसे आयोजित किया गया। कार्यक्रम मेंजिला पंचायत अध्यक्ष शकुन्तला धीरेन्द्र सेन, जिला पंचायत सदस्य सविता चंद्राकर एवं जनपद सदस्य बबिता गणेशन मूर्तिकी गरिमामयी उपस्थिति रही।
कलेक्टर ने कहा—आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए हो रहा संरक्षण
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारीडॉ. गौरव कुमार सिंहने मांढर में ग्रामीणों द्वारा आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गांव की यह पहल प्रकृति संरक्षण के प्रति सामुदायिक लगन का उदाहरण है। तालाब, आर्द्रभूमि, पेड़-पौधों और पक्षियों का संरक्षण केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्किआने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्यहै।
उन्होंने विशेष रूप सेमहिला स्व-सहायता समूहों के प्रयासों की सराहनाकरते हुए कहा कि किसी भी कार्य को शून्य से शुरू कर उसे आगे बढ़ाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। मांढर की महिलाओं के सामने परिस्थितियां और चुनौतियां अलग थीं, लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए अपने सामूहिक प्रयास से कार्य को आगे बढ़ाकर दिखाया है।कलश स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित फूड कार्टइसका एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयास से आजीविका की एक नई पहल को मूर्त रूप दिया है।
उन्होंने कहा किप्रकृति संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिला समूहों के लिए आजीविका के अवसर तैयार होना परियोजना ‘चहचहाट’ की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ऐसे प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समुदाय को अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से भी जोड़ते हैं।
कलेक्टर ने कार्यक्रम में बच्चों से बातचीत की तथा उनके द्वारा तैयार किए गए चित्रों एवं मॉडलों को देखा और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों को प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
जिला पंचायत CEO ने कहा—प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार विश्वरंजनने कहा कि गांव के तालाब, आर्द्रभूमि, पेड़-पौधे और पक्षी स्थानीय प्राकृतिक संपदा हैं। इनके संरक्षण में ग्रामीण समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मांढर के ग्रामीणों एवं ग्राम पंचायत द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा किसामुदायिक भागीदारी से ही संरक्षण के प्रयासों को स्थायित्व दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के अवसर विकसित किए जाने से संरक्षण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी एवं टिकाऊ बनती है।
जनपद CEO ने कहा—संरक्षण के साथ आजीविका को जोड़कर आगे बढ़ेगी परियोजना चहचहाट
जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आशीष केशरवानीने कहा कि परियोजना‘चहचहाट’के माध्यम से मांढर में आर्द्रभूमि एवं पक्षी संरक्षण को सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय आजीविका से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तालाब एवं आसपास के क्षेत्र को पक्षियों के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आगे भीआर्द्रभूमि संरक्षण, पक्षी आवास विकास, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय आजीविकाको साथ लेकर गतिविधियों को विस्तार दिया जाएगा।
सरपंच जी ने कहा—गांव की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत मांढर की सरपंच कुमारी आडिलने कहा कि मांढर के तालाब एवं आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र गांव की महत्वपूर्ण धरोहर है। ग्राम पंचायत का प्रयास है कि ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, बच्चों और युवाओं को साथ लेकर इस प्राकृतिक संपदा का संरक्षण किया जाए।
उन्होंने कहा किपरियोजना ‘चहचहाट’ के माध्यम से संरक्षण के साथ ग्रामीणों के लिए आजीविका के अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है।फूड कोर्ट, ई-रिक्शा जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों को जोड़ने के साथ आगे भी प्रकृति आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत का उद्देश्य है किमांढर का तालाब प्रकृति संरक्षण, शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय आजीविका का केंद्र बने, ताकि वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।
बच्चों ने चित्रों और कृत्रिम घोंसलों से दिया संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम मेंस्वामी आत्मानंद विद्यालय के विद्यार्थियोंने पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण पर बनाए गए चित्र प्रस्तुत किए। बच्चों ने पक्षियों, पेड़ों, राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित विभिन्न विषयों पर चित्र बनाए तथा कई विद्यार्थियों नेकृत्रिम घोंसलेतैयार किए।
कुछ बच्चों नेछत्तीसगढ़ महतारी की वेशभूषामें सहभागिता कर राज्य की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संदेश दिया।
हरेली पर्व की परंपरा एवं संस्कृति को कार्यक्रम से जोड़ते हुए बच्चों के लिएगेड़ी दौड़ एवं फुगड़ीजैसे पारंपरिक खेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
परियोजना चहचहाट के तहत आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान परियोजना‘चहचहाट’के अंतर्गतफूड कोर्ट एवं ई-रिक्शा सेवा का उद्घाटनकिया गया। महिला स्व-सहायता समूह की दीदियों ने प्रतिभागियों के लिए नाश्ते की व्यवस्था की। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिला समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में पहल की गई है।
उद्यानिकी विभाग द्वारा पौधों का वितरणभी किया गया, जिससे हरियाली एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
फूड कोर्ट, ई-रिक्शा एवं भविष्य में विकसित की जाने वाली अन्य प्रकृति आधारित गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर परआजीविका के नए अवसर तैयार करनेकी दिशा में कार्य किया जा रहा है।
हरेली के माध्यम से पक्षी संरक्षण और नागरिक विज्ञान से जुड़ाव
छत्तीसगढ़ का पारंपरिकहरेली पर्व हरियाली, कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीकहै। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए हरेली पक्षी महोत्सव के माध्यम से हरेली कोपक्षियों, जैव-विविधता, आर्द्रभूमि संरक्षण और नागरिक विज्ञान (Citizen Science)से जोड़ा जा रहा है।
Bird Walk एवं Bird Count जैसी गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं को अपने आसपास की पक्षी विविधता को समझने, उसका दस्तावेजीकरण करने और संरक्षण में भागीदारी निभाने का अवसर मिल रहा है।
विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों एवं समुदाय की रही सहभागिता
कार्यक्रम को सफल बनाने मेंग्राम पंचायत मांढर, जिला एवं जनपद पंचायत, विभिन्न विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियोंकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम मेंसमग्र शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग, उद्यानिकी विभाग, बिहान एवं शिक्षा विभागसहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि, जिला एवं जनपद पंचायत के अधिकारी, ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूह, ग्रामीणजन एवं विद्यार्थी शामिल हुए। विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा लगाए गएस्टॉलभी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे, जहां लोगों को संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी गई।
सामूहिक सहभागिता ने हरेली पक्षी महोत्सव कोपक्षी संरक्षण, आर्द्रभूमि संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा, सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय आजीविकासे जोड़ने वाला सार्थक आयोजन बना दिया।
परियोजना ‘चहचहाट’ का उद्देश्य इसी सामुदायिक प्रयास को आगे बढ़ाते हुए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के अवसरों का विकास और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध प्राकृतिक विरासत सुनिश्चित करना है।







