देशनई दिल्ली

अदाणी डिफेंस और इंडो-रशियन राइफल्स के बीच AK-203 के लिए पांच साल का एम्युनिशन सप्लाई समझौता

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के साथ पांच साल का समझौता किया है। IRRPL भारत और रूस का संयुक्त उद्यम है, जो उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में AK-203 असॉल्ट राइफल का निर्माण करता है। समझौते के तहत अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस AK-203 कार्यक्रम के लिए स्वदेशी 7.62×39 mm स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन की आपूर्ति करेगी।

इस समझौते के जरिए AK-203 राइफल के निर्माण और इसके लिए आवश्यक एम्युनिशन के उत्पादन को एकीकृत करते हुए भारत में एक इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन तैयार की जा रही है। अदाणी डिफेंस अगले पांच वर्षों तक AK-203 के लिए 7.62×39 mm एम्युनिशन की सप्लाई करेगी। इससे कार्यक्रम के लिए आवश्यक एम्युनिशन का घरेलू स्रोत उपलब्ध होगा और अनुबंध अवधि के दौरान इसकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

2019 में हुई थी IRRPL की स्थापना

IRRPL की स्थापना वर्ष 2019 में भारत और रूस के बीच हुए इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट के तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए AK-203 असॉल्ट राइफल के निर्माण के उद्देश्य से की गई थी। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित है।

इस संयुक्त उद्यम में भारतीय शेयरधारकों के रूप में एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। वहीं, रूसी पक्ष से कंसर्न कलाश्निकोव और रोसोबोरोनएक्सपोर्ट इसके शेयरधारक हैं। रक्षा मंत्रालय ने IRRPL को AK-203 के स्वदेशी उत्पादन के लिए स्थापित संयुक्त उद्यम के रूप में चिन्हित किया है।

6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफलों का हुआ है अनुबंध

दिसंबर 2021 में IRRPL के साथ 6,01,427 AK-203 राइफलों के निर्माण के लिए अनुबंध किया गया था। इन राइफलों का निर्माण उत्तर प्रदेश के कोरवा स्थित सुविधा में किया जाना है।

वहीं, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत में स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन के निर्माण की क्षमताएं विकसित की हैं। इसमें कानपुर स्थित स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन उत्पादन क्षमता वाली मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी भी शामिल है।

यह समझौता भारत में स्मॉल-आर्म्स की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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