नई दिल्ली (विश्व परिवार)। रसायनशास्त्र यानी केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार-2026 की घोषणा कर दी गई है। फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन (Henri B Kagan) और जापान के केन्सो सोआई को (Kenso Soai) केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार मिला है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है। यह खोज खास तौर पर दवाएं बनाने में काम आ रही है।
नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है।
फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन (Henri B. Kagan) और जापान के केन्सो सोआई को (Kenso Soai) ने उस पुराने कॉन्सेप्ट को गलत साबित किया है, जो कहता है कि 100 परसेंद प्योर प्रोडक्ट बनाने के लिए 100 प्रतिशत ऑप्टिकली प्योर कैटलिस्ट की जरूरत होती है। उन्होंने साबित किया कि केमिकल रिएक्शन खुद ब खुद मनचाहे वर्जन को बढ़ा सकता है. खुद को ठीक कर सकता है।
वहीं जापान के केमिस्ट केन्सो सोआई ने एक रिएक्शन मैकेनिज्म की खोज की है। यह स्नोबॉल इफेक्ट की तरह काम करता है। रिएक्शन से बना मॉलिक्यूल खुद अपने ही बनने की प्रोसेस को गति देता है. इससे वैसी ही और कॉपियां तेजी से बनती है। इस खोज ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि पृथ्वी पर जीवन में अमीनो एसिड, शर्कराएं और अन्य जैविक अणु आखिर एक ही Chiral Form में इतने बड़े पैमाने पर क्यों पाए जाते है।
मिरर इमेज जैसे क्यों होते हैं अणु
रासायनिक प्रतिक्रियाओं में किसी एक Chiral Form (यानी किसी अणु के दो मिरर इमेज के रुप में से एक) की बहुत मामूली बढ़त कैसे समय के साथ बेहद बड़ी हो सकती है। चिरल अणुओं को आप दाएं और बाएं हाथ की तरह समझ सकते हैं। वे दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन एक-दूसरे पर पूरी तरह फिट नहीं बैठते। दवाओं, प्रोटीनों और डीएनए जैसी जैविक प्रणालियों में यह फर्क बहुत अहम होता है, क्योंकि शरीर अक्सर केवल एक खास Chiral Form को ही पहचानता है।







