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जब हर सेकंड कीमती हो: क्रिटिकल केयर की जागरूकता बचा सकती है जान-डॉ. प्रदीप शर्मा

आईसीयू (ICU) ऐसी जगह है, जहां कोई भी जाना नहीं चाहता। फिर भी लगभग हर परिवार में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति होता है, जिसे संक्रमण, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना, बड़ी सर्जरी या जहर के कारण आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा हो। क्रिटिकल केयर उन मरीजों के लिए होती है, जिनकी बीमारी में तुरंत इलाज और देखभाल की जरूरत होती है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। क्रिटिकल केयर इंटेंसिविस्ट और मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा दी जाती है, जिसमें कंसल्टेंट, नर्स, इमरजेंसी फिजिशियन, रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट और टेक्नीशियन शामिल होते हैं।

क्रिटिकल केयर आईसीयू में भर्ती होने से पहले ही शुरू हो जाती है

कुछ बीमारियों के लक्षण ऐसे होते हैं, जिनमें क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ सकती है। जैसे, गंभीर संक्रमण में तेज सांस चलना, भ्रम की स्थिति, ब्लड प्रेशर कम होना और पेशाब कम आना देखा जाता है। हार्ट अटैक में सीने में दबाव, पसीना या सांस फूलना हो सकता है। वहीं स्ट्रोक में अचानक चेहरा टेढ़ा हो जाना, हाथ-पैर में कमजोरी और बोलने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा, जरूरी नहीं कि सबसे नजदीकी अस्पताल में क्रिटिकल केयर की सुविधा हो। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से अस्पताल में चौबीसों घंटे इंटेंसिविस्ट, लाइफ सपोर्ट, जांच की सुविधाएं और क्रिटिकल केयर के अन्य संसाधन उपलब्ध हैं। साथ ही, पहले से ही अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं और तुरंत इलाज देने की क्षमता को देखकर अपना अस्पताल तय कर लेना चाहिए, ताकि गंभीर बीमारी, चोट या किसी भी आपात स्थिति में समय पर सही इलाज मिल सके।

जल्दी पहचानें • जल्दी इलाज कराएं • जल्दी रेफर करें

नीचे कुछ खतरे के संकेत दिए गए हैं, जिन पर तुरंत इमरजेंसी में दिखाना चाहिए:

  • सांस लेने में अचानक या बहुत ज्यादा तकलीफ।
  • अचानक भ्रम होना, बहुत ज्यादा नींद आना, दौरे पड़ना या बेहोशी।
  • सीने में बेचैनी, दबाव या दर्द, साथ में पसीना, जी मिचलाना और सांस फूलना।
  • अचानक कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होना या बोलने और समझने में परेशानी।
  • ब्लड प्रेशर कम होना, चक्कर आकर गिरना या त्वचा का ठंडी और चिपचिपी हो जाना।
  • पेशाब की मात्रा में काफी कमी या शरीर में तेजी से सूजन बढ़ना।
  • गंभीर चोट, जहर, ज्यादा खून बहना या दवा की ओवरडोज।

हर नागरिक क्या कर सकता है

  • सीपीआर (CPR) सीखें और जानें कि इमरजेंसी में मदद कहां से मिलेगी।
  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लक्षण पहचानना सीखें।
  • गंभीर संक्रमण का इलाज समय पर कराएं और अपने मन से एंटीबायोटिक न लें।
  • सड़क सुरक्षा के नियम मानें। हमेशा हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं और बच्चों के लिए चाइल्ड सीट का इस्तेमाल करें।
  • अपनी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी और चल रही दवाओं की सूची अपडेट रखें।
  • परिवार के साथ अंगदान और ऊतक दान के बारे में बात करें।

संवेदनशीलता और स्वास्थ्य लाभ

बेहतरीन क्रिटिकल केयर के लिए विज्ञान के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है। इसका मतलब है कि परिवार के साथ सम्मान से पेश आना और उन्हें हर जानकारी देते रहना, साथ ही मरीज की गरिमा और आराम का ध्यान रखते हुए उसे जल्दी ठीक होने में मदद करना।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी ज्यादातर मरीजों को पुनर्वास, पौष्टिक आहार, फिजियोथेरेपी और मानसिक सहारे की जरूरत होती है। पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

9 अक्टूबर: आईएससीसीएम स्थापना दिवस

इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) की स्थापना 9 अक्टूबर 1993 को हुई थी। तब से इस संस्था ने भारत में क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विकास और नियमन में बड़ा योगदान दिया है। लोगों में क्रिटिकल केयर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए यह दिन चुना गया है।

इस दिन का संदेश सीधा है: सही समय पर जान बचाने वाला इलाज लें। हर व्यक्ति को गंभीर बीमारी या चोट के शुरुआती संकेत पहचानने चाहिए और तुरंत इमरजेंसी में पहुंचना चाहिए। सीपीआर सीखें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा, खासकर एंटीबायोटिक न लें और अंगदान व ऊतक दान के बारे में सोचें।

आईसीयू की हर मशीन के पीछे एक मरीज होता है, उसका परिवार होता है और स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम होती है, जो मिलकर गंभीर बीमारी से लड़ती है।

जब हर सेकंड कीमती हो, तब जागरूकता भी जीवन रक्षक है।

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