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GST नियमों में राहत की मांग: CAIT ने उठाए व्यापारियों के 7 अहम मुद्दे, एमनेस्टी योजना से लेकर ITC तक सुधार के सुझाव

रायपुर (विश्व परिवार)। देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेन्द्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन सुरिन्दर सिंह, जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी, वासु माखीजा, राम मंधान, भरत जैन, राकेश ओचवानी एवं शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) छत्तीसगढ़ चैप्टर के प्रतिनिधिमंडल ने आज अटल नगर, नवा रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित जीएसटी शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee – GRC) की बैठक में शामिल होकर प्रदेश के व्यापारियों से जुड़े जीएसटी संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों एवं व्यावहारिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कैट ने जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी एवं व्यापारियों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

कैट ने कहा कि जीएसटी का उद्देश्य देश में एक सरल, पारदर्शी और प्रभावी कर व्यवस्था स्थापित करना है। व्यापारियों के व्यावहारिक अनुभवों और उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियमों एवं प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार किए जाने से न केवल व्यापार जगत को राहत मिलेगी, बल्कि कर अनुपालन को भी प्रोत्साहन मिलेगा और शासन एवं व्यापारियों के बीच विश्वास और मजबूत होगा।

कैट ने प्रमुखता से उठाए व्यापारियों के हित से जुड़े मुद्दे

बैठक में कैट ने व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव रखे—

  1. पुराने मामलों में एमनेस्टी योजना एवं राहत: पूर्व वर्षों के लंबित जीएसटी रिटर्न, विलंब शुल्क एवं जुर्माने से जुड़े मामलों में राहत देने तथा निर्धारित समय-सीमा के कारण अपील से वंचित रह गए करदाताओं के लिए विशेष अवसर प्रदान करने का सुझाव दिया गया।
  2. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) संबंधी समस्याओं का समाधान: वास्तविक कारोबारी लेन-देन के बावजूद तकनीकी अथवा आपूर्तिकर्ता से संबंधित कारणों से इनपुट टैक्स क्रेडिट में आने वाली कठिनाइयों पर ध्यान देने तथा जीएसटीआर-2बी आधारित प्रतिबंधों की समीक्षा करने का सुझाव रखा गया।
  3. ईमानदार करदाताओं के लिए व्यावहारिक व्यवस्था: जीएसटी अनुपालन रेटिंग को प्रभावी बनाने, अनजाने में हुई त्रुटियों पर दंडात्मक कार्रवाई के स्थान पर सुधार एवं अनुपालन को प्राथमिकता देने तथा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से राहत देने की आवश्यकता बताई गई।
  4. कंपोजिशन डीलरों एवं सेवा प्रदाताओं को राहत: कंपोजिशन योजना की कारोबार सीमा बढ़ाने तथा सेवा प्रदाताओं के लिए पंजीकरण संबंधी सीमा में उपयुक्त वृद्धि करने का सुझाव दिया गया, जिससे छोटे व्यवसायों को अपने कारोबार के विस्तार में सुविधा मिल सके।
  5. ई-इनवॉइस एवं ई-वे बिल से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयां: ई-इनवॉइस के मामलों में खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने तथा ई-वे बिल एवं माल परिवहन के दौरान निर्दोष व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया।
  6. जीएसटीआर-9 एवं रिटर्न में संशोधन की सुविधा: वार्षिक विवरण में वास्तविक त्रुटियों को सुधारने, छूटे हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों के लिए उचित अवसर देने तथा जीएसटीआर-3बी में आवश्यक संशोधन की सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव रखा गया।
  7. अनुपालन संबंधी अन्य महत्वपूर्ण सुधार: नियम 86बी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध की समीक्षा, एचएसएन कोड संबंधी आवश्यकताओं में एकरूपता तथा गैर-जीएसटी खर्चों से संबंधित विवरणों को लेकर अनावश्यक अनुपालन भार कम करने जैसे विषय भी उठाए गए।

कैट ने स्पष्ट किया कि इन सुझावों का उद्देश्य कर दायित्वों से बचने की छूट मांगना नहीं, बल्कि वास्तविक करदाताओं को प्रक्रियागत कठिनाइयों से राहत दिलाना, अनावश्यक विवादों को कम करना और कर व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करना है।

कैट के पदाधिकारियों ने व्यापारियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखा

बैठक में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT), छत्तीसगढ़ चैप्टर की ओर से प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन के नेतृत्व में सीए मुकेश मोटवानी, सीए किशोर बरड़िया, विजय गोयल, दीपक विधानी, कन्हैया गुप्ता सहित कैट के अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के व्यापारियों से जुड़े जीएसटी संबंधी विभिन्न विषयों को अधिकारियों के समक्ष रखते हुए उनके व्यावहारिक समाधान एवं कर व्यवस्था को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

कैट प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन एवं व्यापारिक संगठनों के बीच इस प्रकार का सकारात्मक संवाद व्यापारियों की समस्याओं के समाधान, कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने तथा प्रदेश में व्यापार के अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

शासन और व्यापार जगत के बीच संवाद से निकलेंगे सकारात्मक परिणाम

कैट का मानना है कि शासन और व्यापारियों के बीच नियमित संवाद किसी भी कर सुधार को प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। व्यापारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान होने से व्यापारिक गतिविधियों में सुगमता आएगी, अनावश्यक मुकदमेबाजी में कमी आएगी और व्यापारी स्वेच्छा से कर अनुपालन के लिए अधिक प्रोत्साहित होंगे।

कैट छत्तीसगढ़ ने आशा व्यक्त की कि बैठक में प्रस्तुत सुझावों पर संबंधित स्तर पर सकारात्मक विचार-विमर्श होगा तथा व्यापारी हितों और शासन के राजस्व हितों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आवश्यक सुधारों की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

कैट ने दोहराया कि संगठन व्यापारियों की समस्याओं को शासन के समक्ष रचनात्मक ढंग से रखने और जीएसटी व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

बैठक में उपस्थित अधिकारियों में मुख्य आयुक्त मानस आर. मोहंती, प्रधान आयुक्त पराग सी. बोरकर, आयुक्त, राज्य कर पुष्पेंद्र के. मीणा, विशेष आयुक्त तरन्नुम वर्मा, संयुक्त आयुक्त अमित चंदेल, अरविंद कुमार, सोनल के. मिश्रा एवं भावना अली, अपर आयुक्त योगेश यादव, उपायुक्त पिंकी बास्के, नितिन गर्ग एवं प्रतिष्ठा ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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