नई दिल्ली (विश्व परिवार)। ब्रिक्स संसदीय मंच ने मंगलवार को आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा की और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समन्वित एवं ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की दो दिवसीय बैठक में इस संबंध में बनी सहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आतंकवाद से निपटने के लिए सदस्य एवं भागीदार देशों के साझा संकल्प को दर्शाती है। बिरला ने इस समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सम्मेलन में संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे सदस्य तथा भागीदार देशों की साझा सोच एवं सहयोग की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस मंच से आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध समन्वित और ठोस कार्रवाई करने का भी आह्वान किया है।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रों की संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई है। उनके अनुसार, घोषणा पत्र में संसदीय सहयोग, डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग और अधिक समावेशी एवं प्रतिनिधिक वैश्विक व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया गया है। यह सहमति भविष्य में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगी।
विश्व के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और अस्थिरता तथा आर्थिक अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में संवाद, विश्वास और सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत का यह विश्वास रहा है कि विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, संवाद में है, युद्ध में नहीं, शांति में है और प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग में है।’’
बिरला ने कहा कि सभी देशों को ऐसे विश्व के निर्माण के लिए मिलकर काम करना चाहिए, जहां प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान हो, अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से किया जाए और विकास के अवसर सभी को समान रूप से उपलब्ध हों।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और विकास के अनुभवों को एक साथ लाता है तथा इस विविधता में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स की सफलता केवल उसके सदस्य देशों की प्रगति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक विश्व समुदाय तक पहुंचना चाहिए।
बिरला ने कहा कि विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं में उचित स्थान मिलना चाहिए। उनका कहना था, ‘‘हमारा उद्देश्य किसी के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ना होना चाहिए।’’
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्रौद्योगिकी का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके जिम्मेदार उपयोग से संसदीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और नागरिकों की भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई का इस्तेमाल नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करने वाले चीन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नई दिल्ली से यह संदेश जाना चाहिए कि संवाद निरंतर रहे, विश्वास और मजबूत हो तथा सहयोग ठोस परिणामों में बदले।







