रायपुर (विश्व परिवार)। नवा रायपुर के तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध तेज होने लगा है। इसके खिलाफ माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। साथ ही समिति ने इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है।
नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष सुजीत कुमार घिदौड़े ने कहा कि किसी भी कीमत पर पेड़ों की कटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारा विरोध सरकार के विकास कार्यों से नहीं है और न ही हम फिल्म सिटी बनाने के खिलाफ हैं। लेकिन इसके लिए दूसरी जगह का चयन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को पेड़ लगाने और ऑक्सीजन तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। नवा रायपुर में फिल्म सिटी बनाने के लिए दूसरी जगह भी उपलब्ध हो सकती है। जंगल काटकर विकास करने की जरूरत नहीं है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
1100 पौधे लगाने का दावा, मौके पर 530 ही मिले; वे भी सूखे
माना-तूता जंगल संघर्ष समिति के सदस्य कृणाल सिन्हा ने कहा कि जंगल को बचाने के लिए पिछले 9 महीने से निगरानी कर रही निरगारी समिति आने वाले दिनों में और मजबूती से काम करेगी। इस मुद्दे को आम जनता तक पहुंचाकर जन आंदोलन बनाया जाएगा। माना-तूता जंगल के पेड़ों को कटने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पर्यटन मंडल के एमडी 1100 पौधे लगाने का दावा कर रहे हैं, जबकि मैंने खुद मौके पर गिनती की तो 530 पौधे ही मिले। ये सभी सूख चुके हैं। उन्होंने बताया कि पर्यटन मंडल की बाउंड्री और फिल्म सिटी की बाउंड्री के बीच ये पौधे लगाए गए थे, जो अब सूख गए हैं।
गांधी जयंती पर कर्मचारियों ने लगाए थे 1,000 पौधे
माना-तूता में प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी परिसर में इस साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इस दौरान टूरिज्म बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारियों ने करीब 1,000 पौधे लगाए थे।
उस समय छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा था कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण के अनुकूल विकसित किया जाएगा।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। परिसर में अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और उनके जीवित रहने की व्यवस्था भी की जाएगी।
हालांकि, फिल्म सिटी परियोजना के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद से माना-तूता जंगल संघर्ष समिति और कांग्रेस इसका विरोध कर रही हैं।
पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग
माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने 28 अक्टूबर को भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
समिति ने पत्र में कहा है कि माना-तूता का मानव निर्मित जंगल रायपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। दशकों की मेहनत से बंजर और पथरीली जमीन पर विकसित यह जंगल जैव विविधता और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह राजधानी क्षेत्र के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
समिति ने कहा है कि जंगल के बीच कुछ खाली जमीन भी उपलब्ध है, जहां सार्वजनिक पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और पर्यावरण शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। वहीं, फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में दूसरी जगह सैकड़ों एकड़ खाली जमीन उपलब्ध होने का दावा भी किया गया है। ऐसे में समिति ने फिल्म सिटी को किसी दूसरी जगह बनाने की मांग की है।
समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ पेड़ लगाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर फिल्म सिटी के नाम पर वर्षों में विकसित जंगल के हजारों पेड़ों की कटाई की आशंका है। समिति ने स्मृति ईरानी से इस मामले में हस्तक्षेप कर पेड़ों की कटाई रुकवाने की मांग की है।
27 अक्टूबर से दोबारा शुरू हुई पेड़ों की कटाई
माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए 27 अक्टूबर से पेड़ों की कटाई दोबारा शुरू हो गई है। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झूमाझटकी भी हुई।
पुलिस 10 ग्रामीणों को माना थाने ले गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर कांग्रेस के शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थाने पहुंचे और घेराव किया। करीब एक घंटे बाद पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं। इन्हें तैयार होने में दशकों लगे हैं। फिल्म सिटी के लिए करीब 100 एकड़ क्षेत्र में निर्माण प्रस्तावित है।
ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने की आशंका है। ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जंगल को नुकसान पहुंचाकर परियोजना बनाने के खिलाफ हैं।








