रायपुर (विश्व परिवार)। करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। कड़ी सुरक्षा और भारी पुलिस पहरे के बीच उसे विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर की अदालत में लाया गया। CBI ने पूछताछ के लिए 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी है। हालांकि, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने उसकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे अवैध बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई लंच के बाद निर्धारित की है।
अदालत में CBI की ओर से चंदन सिंह पैरवी कर रहे हैं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से तुषार गिरी और शशांक मिश्रा पक्ष रख रहे हैं। हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुनवाई के दौरान ED के वरिष्ठ अधिकारी भी अदालत में मौजूद रहे।
गिरफ्तारी के दस्तावेज नहीं दिखाने का बचाव पक्ष का आरोप
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने CBI की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। वकीलों ने दलील दी कि एजेंसी ने गिरफ्तारी से जुड़े अहम दस्तावेज अदालत के सामने नहीं रखे हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि CBI इस मामले में आज अलग स्टैंड ले रही है।
वकीलों ने ED के तहत दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग यानी PMLA मामले में हुई गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की शर्तों का भी हवाला दिया। उनका तर्क है कि ओमान ने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की मंजूरी ED के मामले में दी थी, ऐसे में CBI के मामलों में उसके खिलाफ कार्रवाई प्रत्यर्पण की शर्तों का उल्लंघन हो सकती है।
CBI ने कहा- नए आदेश के तहत हुई गिरफ्तारी
बचाव पक्ष की दलीलों पर CBI ने जवाब दिया कि जिन आदेशों का हवाला दिया जा रहा है, वे पुराने हैं। एजेंसी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी नए आदेश के तहत हुई है, जिसमें किसी विशेष जांच एजेंसी का उल्लेख नहीं है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर यही विवाद सामने आया था। उस समय CBI की ओर से कहा गया था कि रायपुर की विशेष अदालत पहले ही चंद्राकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। ED और CBI के मामले आपस में जुड़े हुए हैं और अभियोजन की वैधता पर फैसला रायपुर की अदालत करेगी। दिल्ली की अदालत के सामने केवल ट्रांजिट रिमांड का मामला था।
ओमान से प्रत्यर्पण के बाद दिल्ली होते हुए रायपुर पहुंचा
सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CBI की टीम 1 नवंबर को उसे मस्कट से भारत लेकर आई थी। इसके बाद सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने CBI को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि उसे 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाए।
इसके बाद मंगलवार को CBI की टीम उसे फ्लाइट E6 2307 से दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची। बुधवार को निर्धारित समय के भीतर उसे विशेष अदालत में पेश किया गया।
116 दिन बाद भारत लाया गया, दुबई में रह रहा था आरोपी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। आरोप है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इनमें ‘अजंता मेंडिस’ के नाम से कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी शामिल था। बाद में वह ओमान पहुंचा, जहां रॉयल पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के 116 दिन बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाया गया।
ओमान की अदालत ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को दी प्राथमिकता
सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के लिए UAE ने भी प्रत्यर्पण की मांग की थी। ओमान की मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने 8 अक्टूबर 2026 को भारत के अनुरोध को प्राथमिकता देने का फैसला सुनाया। भारत ने 12 जुलाई को प्रत्यर्पण याचिका दाखिल की थी, जबकि UAE की याचिका 14 जुलाई को ओमान पहुंची थी।
भारतीय दूतावास ने 30 अगस्त को उसकी नागरिकता की पुष्टि की थी। चंद्राकर ने वानुअतु की नागरिकता होने का दावा किया था, लेकिन ओमान की अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। भारत ने ओमान को आश्वासन दिया था कि बिना उसकी अनुमति सौरभ को किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जाएगा और उसे निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलेगा। साथ ही, पुराने मामलों में मुकदमा नहीं चलाने का भरोसा भी दिया गया था। UAE की ओर से जरूरी आश्वासन नहीं दिए जाने के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को प्राथमिकता मिली। ओमान में फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा मामला भी प्रत्यर्पण में देरी की वजह बना।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सौंपी थीं 13 FIR
महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 13 FIR एजेंसी को सौंपी गई थीं। इनमें से दो मामलों में CBI आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। दूसरी तरफ ED भी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच कर रही है और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को हवाला समेत अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर किया गया। UAE में चंद्राकर की भव्य शादी, निजी जेट और बड़े आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की भी जांच हुई है। इस मामले में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई FIR दर्ज हैं और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
भिलाई से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
भिलाई से ताल्लुक रखने वाले सौरभ चंद्राकर का नाम महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, छोटे स्तर से शुरू हुआ कथित सट्टेबाजी कारोबार धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में बदल गया। इसके संचालन में दुबई समेत विदेशों में मौजूद लोगों और कंपनियों की भूमिका की जांच की गई है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर CBI को बधाई दी थी। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इस कार्रवाई से संरक्षण राशि के लेन-देन को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं।
अब रायपुर कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
इस मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या CBI को सौरभ चंद्राकर की कस्टोडियल रिमांड मिलेगी। एजेंसी उससे कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेन-देन, विदेशों में बनी कंपनियों और इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ करना चाहती है।
इसके अलावा जांच के दायरे में कथित तौर पर नेटवर्क को मिलने वाला संरक्षण और हवाला के जरिए हुए लेन-देन जैसे पहलू भी हैं। अदालत में रिमांड को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस जारी है। अब लंच के बाद होने वाली सुनवाई और अदालत के फैसले पर नजर रहेगी।







