रायपुर (विश्व परिवार)। रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-8 कार्यालय में उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब जोन अध्यक्ष ने अपने ही जोन कार्यालय में तालाबंदी कर धरना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि वार्डों में छोटे-छोटे विकास कार्य नहीं होने और अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया। इस घटना को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले पर रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सत्ताधारी दल और महापौर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी पार्टी के पार्षदों को ही अपने वार्डों के काम कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है और उन्हें धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आकाश तिवारी ने कहा कि नगर निगम में सड़क, बिजली और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए पार्षदों को बार-बार जोन कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश, नगर और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार है, तब भी नगर निगम के जनप्रतिनिधियों को अपने कामों के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
निगम का संचालन कौन कर रहा है, अधिकारी या महापौर?
नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर रायपुर नगर निगम का संचालन कौन कर रहा है? क्या अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं या महापौर के निर्देशों के अनुसार व्यवस्था चल रही है? उन्होंने कहा कि महापौर को भी सड़क, बिजली और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर विशेष सामान्य सभा बुलानी पड़ रही है, जो निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
तिवारी ने दावा किया कि नगर निगम में महापौर, विधायक, सत्ताधारी पार्षद और महापौर परिषद (MIC) के सदस्य तक असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के ही काम नहीं हो रहे हैं, तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान किस तरह होता होगा।
महापौर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
आकाश तिवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार के कार्यकाल में जनता, व्यापारी, कर्मचारी, पटवारी और किसान विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार की घोषणाओं और जमीनी स्तर की स्थिति में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने जोन कार्यालय में तालाबंदी की घटना को नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने महापौर से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि जोन अध्यक्ष को अपने ही कार्यालय में तालाबंदी कर धरने पर क्यों बैठना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के पार्षदों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो आम जनता की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।







