देशनई दिल्ली

भारत और ऑस्ट्रिलया के बीच सीएसआईआर के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय तक पहुंच के लिए समझौता

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आईपी ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान सीएसआईआर के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (सीएसआईआर-टीकेडीएल) तक पहुंच के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज एमपी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
भारत ने अपनी तरह का पहला टीकेडीएल विकसित किया है
भारत ने गलत पेटेंट आवंटन की वजह से अपने समृद्ध पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनी तरह का पहला पूर्व-कला डेटाबेस, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) विकसित किया है। इस समझौते के तहत, आईपी ऑस्ट्रेलिया को टीकेडीएल डेटाबेस तक पहुंच प्राप्त होगी ताकि ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कानूनों और जांच प्रक्रियाओं के अनुसार पेटेंट आवेदनों की जांच करते समय प्रासंगिक पूर्व-कला की पहचान की जा सके। यह समझौता अधिक जानकारीपूर्ण और कुशल पेटेंट जांच को सुगम बनाएगा तथा भारत की प्रलेखित पारंपरिक विरासत का हिस्सा बन चुके ज्ञान पर पेटेंट के आवंटन को रोकने में मदद करेगा।
दोनों देश समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के भंडार
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के भंडार हैं जो सदियों से विकसित हुई हैं और दुरुपयोग के प्रति संवेदनशील हैं। समझौते पर हस्ताक्षर दोनों देशों की पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करने और प्रलेखित पूर्व कला के प्रभावी उपयोग के माध्यम से बौद्धिक संपदा प्रणालियों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
क्या है टीकेडीएल
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (सीएसआईआर-टीकेडीएल) की स्थापना वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आयुष मंत्रालय की संयुक्त पहल के माध्यम से वर्ष 2001 में की थी। यह पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए समर्पित विश्व का पहला डेटाबेस है।
भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित पेटेंटों के गलत अनुदान को रोकने के उद्देश्य से विकसित सीएसआईआर-टीकेडीएल में अभी आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और योग से संबंधित 5.2 लाख से अधिक सूत्रों और प्रथाओं की जानकारी शामिल है। इसका पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं – अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश में अनुवाद किया गया है, ताकि विश्व भर के पेटेंट परीक्षकों द्वारा इसका उपयोग किया जा सके।
आईपी ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते पर हस्ताक्षर के साथ अठारह पेटेंट कार्यालयों को अब गोपनीयता समझौतों (एनडीए) के तहत डेटाबेस तक पहुंच प्राप्त है। सीएसआईआर-टीकेडीएल ने भारत के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और डेटाबेस से प्राप्त पूर्व कला साक्ष्यों के आधार पर दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदनों को रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लिया या त्याग दिया गया है।
अहम है टीकेडीएल पहुंच समझौता
गौरतलब हो, टीकेडीएल पहुंच समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय चर्चाओं के अठारह प्रमुख नतीजों में से एक है, जिसमें रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया था।

 

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