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कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ‘टैसिट नॉलेज’ को मिलेगा नया आयाम : डॉ. अकीरा यामानाका

  • एनआईटी रायपुर में “ग्लोबल कोलैबोरेशन एंड एकेडमिक एक्सचेंज” पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

रायपुर (विश्व परिवार)।। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) के माध्यम से “टैक्टिकल टैसिट नॉलेज” को दृश्य रूप में प्रस्तुत कर जटिल मानवीय अनुभवों और विशेषज्ञता को वैज्ञानिक मॉडल में बदला जा सकता है। जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अकीरा यामानाका ने सोमवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-एनआईटी), रायपुर में आयोजित “ग्लोबल कोलैबोरेशन एंड एकेडमिक एक्सचेंज” विषयक एक दिवसीय सेमिनार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि टैसिट नॉलेज संदर्भ आधारित, समय-संवेदी और गैर-मौखिक प्रकृति का होता है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन होता है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने एक अनुभवी रसोइए का उदाहरण दिया, जो बिना किसी औपचारिक निर्देश के यह समझ लेता है कि भोजन कब पूरी तरह तैयार हो चुका है।
सेमिनार में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर (एचएजी) डॉ. सी. कृष्णा मोहन तथा एनआईटी मणिपुर के निदेशक डॉ. डी. वी. एल. एन. सोमयाजुलु मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्थान के फैकल्टी सदस्यों और शोधार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का समन्वयन कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने किया।
डॉ. अकीरा यामानाका ने अपने व्याख्यान में ह्यूमन इंटरफेस, एआई प्रोसेसिंग और हार्डवेयर सेंसर पर आधारित “थ्री-टियर आर्किटेक्चर” की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने एस.ई.सी.आई. मॉडल — समाजीकरण, बाह्यकरण, संयोजन और आत्मसात्करण — पर आधारित अपने शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रणाली व्यक्तिगत अनुभव आधारित विशेषज्ञता पर निर्भरता को कम करती है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रणाली हार्डवेयर सेंसर और भौतिक ट्रैकिंग से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर उन्हें वस्तुनिष्ठ मॉडल और सिमुलेशन में परिवर्तित करती है।
एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक शैक्षणिक सहयोग उच्च शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से अनुसंधान अनुदान और वित्तीय सहायता प्राप्त करना अधिक सहज हो जाता है। जापान से आए प्रथम विजिटिंग एक्सपर्ट के रूप में डॉ. यामानाका का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोग से संस्थानों को वैश्विक पहचान और अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होते हैं।
डॉ. सी. कृष्णा मोहन ने एहिमे यूनिवर्सिटी और आईआईटी हैदराबाद के बीच सफल अकादमिक सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने एनआईटी रायपुर और जापानी संस्थानों के बीच वर्तमान एकेडमिक एक्सचेंज का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि डॉ. यामानाका विभिन्न विषयों में फैकल्टी और छात्र विनिमय कार्यक्रमों को सक्रिय समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई मानव विशेषज्ञों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला प्रभावी माध्यम है।
एनआईटी मणिपुर के निदेशक डॉ. डी. वी. एल. एन. सोमयाजुलु ने कहा कि इस प्रकार के समर्पित अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारतीय तकनीकी संस्थानों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल भारतीय विद्यार्थियों के लिए जापान में अध्ययन और शोध के नए अवसर उपलब्ध कराएगी तथा जापानी छात्रों के लिए भी भारत में अकादमिक आदान-प्रदान का मार्ग प्रशस्त करेगी।
सेमिनार का समापन अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।

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