रायपुर (विश्व परिवार)। तीजा पर क्यों खाया जाता है करेला? महापर्व पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निभाई 7 साल पुरानी परंपरा, 1000 घरों में भेजा करेला।
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नारी पर्व तीजा-पोरा तिहार की धूम है। आज कड़ू भात खाने का दिन है और कल माताएं-बहनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। इस पावन अवसर पर रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी* ने अपने वार्ड क्रमांक 34 – पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड में परंपरा को जीवंत रखते हुए अनूठी पहल की।
तीजा पर करेला क्यों खाया जाता है? – इसका महत्व
छत्तीसगढ़ में तीजा के एक दिन पहले करेला खाने (कड़ू भात) की परंपरा सदियों पुरानी है। इसके दो बड़े कारण हैं –
1. धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व: मान्यता है कि करेले का कड़वापन शरीर के अंदर की अशुद्धियों को बाहर निकाल देता है, ताकि दूसरे दिन जब माताएं निर्जला व्रत रखें तो उनका शरीर और मन दोनों शुद्ध रहे। आयुर्वेद में भी करेला रक्त को शुद्ध करने वाला माना गया है।
2. कड़वे से मीठे की ओर: कड़ू भात यह संदेश देता है कि जीवन के सारे कड़वे अनुभवों को आज ही त्याग कर, कल से मीठे और सुखमय जीवन की शुरुआत की जाए।
आकाश तिवारी ने निभाई 7 साल पुरानी परम्परा
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी विगत 7 वर्षों से लगातार इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इस वर्ष भी उन्होंने अपने वार्ड की 800 से 1000 माताओं, बहनों, बहू-बेटी, भाभियों सहित सभी तीजनहारिन नारीशक्तियों के घर-घर जाकर करेला भेजा और कड़ू भात के नेवता का नेग पूरा किया।
खास बात यह है कि तीजा के समय बाजार में करेले का दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। इस महंगाई के दौर में भी आम परिवारों को बाजार की चिंता न करनी पड़े, इसलिए श्री तिवारी द्वारा यह नेग निःशुल्क पहुंचाया गया।
इस अवसर पर आकाश तिवारी ने कहा – “तीजा केवल व्रत नहीं, यह हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, नारी सम्मान और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। मेरी वार्ड की हर माता-बहन मेरे परिवार का हिस्सा है। उनका यह नेग करना मेरा सौभाग्य है। मैं सभी तिजहारिन माताओं-बहनों को तीजा की बधाई देता हूँ।”
वार्डवासियों ने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी की इस पहल की सराहना की और कहा कि संस्कृति को जीवंत रखने का यह सबसे सुंदर तरीका है।







