रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के द्वारा चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के मार्गदर्शन में तेलीबांधा स्थित होटल किंग्सवे में ”डिजिटल रक्षाः-सुरक्षित डिजिटल इंडिया, सुरक्षित आपका कल” विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सफल सत्र का आयोजन हुआ। इस विशेष सत्र में रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए व्यापारियों और उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों, ऑनलाइन सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की उपयोगिता व चुनौतियों से व्यापारिक जगत को अवगत कराना था।
चेम्बर प्रदेश कोषाध्यक्ष निकेश बरडिया ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में व्यापार का डिजिटलीकरण अनिवार्य हो चुका है, किंतु इसके साथ आने वाले जोखिमों के प्रति सजग रहना भी उतना ही जरूरी है। उपस्थित सभी व्यापारी भाइयों और प्रबुद्ध जनों, आज हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ तकनीक हमारे व्यापार का हिस्सा ही नहीं, बल्कि उसकी नींव बन चुकी है। ”डिजिटल रक्षा” केवल आज की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाले भविष्य के लिए हमारा सबसे महत्वपूर्ण निवेश है।
जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, व्यापार का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) और डिजिटल ट्रांजेक्शन हमारे बिजनेस की रीढ़ होंगे। यदि आज हम इन तकनीकों और सुरक्षा उपायों को नहीं अपनाते, तो भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हम पिछड़ सकते हैं। आने वाला समय डेटा का है, और जो व्यापारी अपने डेटा को सुरक्षित रखना जानता है, वही भविष्य का सफल उद्यमी होगा।
मेरा मानना है कि ”डिजिटल रक्षा” अभियान हमें भविष्य के उन साइबर खतरों के लिए तैयार करेगा जो अभी विकसित हो रहे हैं। हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का हर व्यापारी तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर और निडर बने। चेम्बर का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध व्यापारिक वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हम आने वाले समय में भी तकनीक के इस सफर में आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे।”
सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्री सौरभ माहेश्वरी जी ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में व्यापार की प्रगति जितनी तेज हुई है, साइबर अपराधियों के जाल भी उतने ही सूक्ष्म और खतरनाक हो गए हैं। उन्होंने व्यापारियों को आगाह करते हुए बताया कि आजकल एआई के माध्यम से होने वाली ठगी सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरी है, जिसमें ”डीपफेक” तकनीक के जरिए किसी परिचित की आवाज या चेहरा बनाकर व्यापारिक भुगतान करवा लिए जाते हैं। इसके अलावा फिशिंग ईमेल, फर्जी बैंक कॉल, और रैनसमवेयर जैसे हमले व्यापारियों के पूरे डेटा को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है। इन खतरों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि साइबर अपराधी अब आपकी तकनीकी कमजोरी से ज्यादा आपके विश्वास और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।
सुरक्षा के उपायों पर चर्चा करते हुए माहेश्वरी जी ने व्यापारियों को स्वयं की रक्षा के लिए ”डिजिटल स्वच्छता” (DIgital Hygiene) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने विस्तार से बताया कि हर व्यापारी को अपने सभी वित्तीय खातों और सोशल मीडिया पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचनी चाहिए और अपने व्यापारिक सॉफ्टवेयर व सिस्टम को हमेशा अपडेट रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा की पहली परत आपकी जागरूकता है। कभी भी अपना ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें, चाहे सामने वाला व्यक्ति स्वयं को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए। नियमित रूप से अपने महत्वपूर्ण डेटा का ऑफलाइन बैकअप लेना भी सुरक्षा का एक अभिन्न हिस्सा है।
यदि कोई व्यापारी दुर्भाग्यवश साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो श्री माहेश्वरी जी ने तत्काल कदम उठाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ठगी होने के शुरुआती एक से दो घंटे ”गोल्डन ऑवर” कहलाते हैं, जिसमें राशि वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है। ऐसे मामले में बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या आधिकारिक पोर्टल ww.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, संबंधित बैंक को तुरंत सूचित कर खाते और कार्ड को ब्लॉक करवाना अनिवार्य है। उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि डिजिटल फुटप्रिंट्स के माध्यम से अपराधियों तक पहुँचा जा सकता है, बस शर्त यह है कि पीड़ित व्यक्ति डरे नहीं और तुरंत कानूनी व तकनीकी मदद लें।
कार्यक्रम का सफल समन्वय चेम्बर के उपाध्यक्ष और प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर जितेन्द्र शदीजा जी द्वारा किया गया। सत्र के दौरान व्यापारियों ने विशेषज्ञ से सीधे संवाद कर अपनी तकनीकी शंकाओं का समाधान भी किया। अंत में चेम्बर कार्यकारी अध्यक्ष श्री राधाकिशन सुन्दरानी ने सभी अतिथियों और सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी व्यापारियों के हित में ऐसे तकनीकी और जागरूकता सत्र आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यशाला में प्रमुख रूप से चेम्बर प्रदेश कोषाध्यक्ष निकेश बरड़िया, सलाहकार-सरल मोदी,चेयरमेन गोपाल कृष्ण अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष-जसप्रीत सिंह सलूजा ,राधाकिशन सुंदरानी, कार्यकारी महामंत्री कपिल दोशी, ट्रांसपोर्ट चेम्बर अध्यक्ष हरचरण सिंह साहनी, उपाध्यक्ष-लोकेश चंद्रकांत जैन, टी.श्रीनिवास रेड्डी ,दिलीप इसरानी, जितेंद्र शादीजा, राम पंजवानी, शांतिलाल बरडिया, जयचंद नवानी, मनीष प्रजापति, कन्हैया महतो,
विकास पंजवानी, नरेंद्र हरचंदानी, हरिराम तलरेजा, राजीव खत्री , राजेश गिदवानी, अजय जयसिंघानी, महेंद्र बगरोडिया, मंत्री- भरत पमनानी, आकाश डुडानी, आशीष वासवानी, राहुल खूबचंदानी, पंकज छिजवानी, पंकज जैन,रितेश वाधवा, धनेश मटलानी, गुलाबचंद साहू,राजीव जैन, जतिन नचरानी,विनोद पाहवा, महिला चेम्बर अध्यक्ष- डॉ ईला गुप्ता,कोषाध्यक्ष-नम्रता श्रीकांत अग्रवाल, हेमल शाह, ज्योति ड्रोलिया, पायल, बीरगांव व्यापारी संघ अध्यक्ष- रमाशंकर देवांगन, सचिव नारायण सेन, रविकांत तिवारी, छत्ततीसगढ़ ग्लास एसोसियेशन अध्यक्ष प्रहलाद शादीजा, प्रोथिक कंसलटेन्ट प्रा.लि. से प्रतीक कुमार बाजपेयी, सी.ए.धवल गांधी, उमेश यादव, आकाश, सी.ए. प्रदीप पाल, सदस्य-निखिल पंड्या, अर्पित शाह, राहुल अग्रवाल, बालकिशन मित्तल, अंशु मित्तल, वेदांत मित्तल, लव्यम मित्तल, शंकरलाल दानवानी, फनेन्द्र देवांगन, राघवेंद्र देवांगन, विनिता शादीजा, मुरलीधर शादीजा, स्वयं रामानी, पवन सोनी, हेमंत तोलानी, कमल शर्मा, माधव साहू, चंदन साहू, डाॅ. बी.जी. भोजवानी,घनश्याम बजाज, हेेेमंत तोलानी, गुरदास तोलानी, मौलिक करनावत, पियूष दौलतानी, राहूल अग्रवाल, सरफराज हुसैन, शैलेन्द्र गोयनका, राजकुमार, तनिश दौलतानी सहित बड़ी संख्या में व्यापारीगण उपस्थित रहे।








