देशनई दिल्ली

पीलीभीत में बनेगा देश का पहला बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र, 70 साल के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली (विश्व परिवार)। भारत में बासमती चावल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), कृषि विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत पीलीभीत के टांडा बिजैसी में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना के लिए भूमि हस्तांतरण को औपचारिक रूप दिया गया।
सात एकड़ में विकसित होगा आधुनिक केंद्र
प्रस्तावित बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में सभागार, बासमती और जैविक खेती पर संग्रहालय व गैलरी, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला और जैविक खेती से जुड़ी सामग्री के भंडारण की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
देश का पहला बासमती-जैविक प्रदर्शन फार्म
स्थापना के बाद यह केंद्र देश का पहला बासमती जैविक प्रशिक्षण और प्रदर्शन फार्म होगा, जिसमें पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती शामिल होगी। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के किसानों व हितधारकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
जितिन प्रसाद ने जताई संभावनाएं
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने पहल की सराहना करते हुए पीलीभीत को बासमती चावल का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बनाने की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जैविक खेती के विस्तार और किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही एआई-आधारित इंटरैक्टिव संग्रहालय और गुणवत्तापूर्ण बीज व जैविक सामग्री के लिए विशेष आउटलेट स्थापित करने का सुझाव भी दिया।
एआई आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना शुरू
इस दौरान भारत की पहली एआई-आधारित बासमती धान सर्वेक्षण परियोजना (2026-2028) का भी अनावरण किया गया, जिसे एपीईडीए और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (एआरआईईए) के सहयोग से लागू किया जाएगा। यह परियोजना करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करेगी और 1.5 लाख से अधिक सर्वेक्षण बिंदुओं से डेटा जुटाएगी, साथ ही 5 लाख से अधिक किसानों के साथ मिलकर काम करेगी। इसका उद्देश्य सटीक फसल मूल्यांकन, किस्मों की पहचान और बेहतर निर्यात योजना तैयार करना है।
एआईसीआरपी केंद्र के रूप में मान्यता
आगामी केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के बासमती चावल परीक्षणों के लिए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) केंद्र के रूप में भी नामित किया गया है। इससे पहले नगीना और मोदीपुरम में ऐसे केंद्र स्थापित हैं। यह नया केंद्र क्षेत्र विशेष की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप नई बासमती किस्मों के परीक्षण में मदद करेगा।
बासमती निर्यात में भारत की मजबूत पकड़
भारत का जीआई टैग प्राप्त बासमती चावल 2025-26 में 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ करीब 65 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बाजारों में इसकी मजबूत मौजूदगी भारत के कृषि निर्यात में अहम योगदान दे रही है।
जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा एपीईडीए
एपीईडीए प्रशिक्षण, प्रमाणन सहायता और बाजार संपर्क जैसी पहलों के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है। ये प्रयास वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के अनुरूप हैं।
कार्यक्रम में रही व्यापक भागीदारी
इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, जिले के वरिष्ठ जन प्रतिनिधि, एपीईडीए के अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित हितधारक उपस्थित रहे।

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