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जीवन में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है : आई. पी. मिश्रा

रायपुर (विश्व परिवार)। आई पी मिश्रा का नाम किसी पहचान या परिचय का मोहताज नहीं है।6 अगस्त 1942 को रीवा, मध्यप्रदेश के छोटे से गांव में जन्मे श्री मिश्रा ने रविशंकर विश्विद्यालय रायपुर से बी ई आनर्स,मैकेनिकल इंजीनिरिंग में उत्तीर्ण की। उन्होंने तीन दशक से भी ज्यादा वर्षों तक भिलाई स्टील प्लांट में एक कुशल इंजीनियर और प्रशासक के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। जनरल मैनेजर,प्रोजेक्ट के पद पर सेवा निवृत हुए हैं। आई पी मिश्रा प्रख्यात जगद्गुरु स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महराज जी के संपर्क में आए और उनकी जिंदगी ने एक नया मोड लिया और वे शिक्षा तथा आध्यात्म के लिए समर्पित हो गए। उहोंने 1986 में अविभाजित प्रदेश की उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(बी आई टी) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।उनका सफर यहीं नहीं रुका उन्होंने भिलाई का एजुकेशन हब के रूप में स्थापित करने बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान भिलाई और रायपुर में स्थापित किए।जिनसे आज शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की अलग पहचान बन गई है।
श्री मिश्रा ने 1994 में श्री गंगाजली शिक्षण समिति की स्थापना की और इस समिति के माध्यम से कई इंजीनियरिंग,नर्सिंग, फार्मेसी,मेडिकल,कला विज्ञान,मैनेजमेंट के महविधालय संचालित हो रहें हैं। संस्था के मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने कोविड कल में जनसेवा की मिशाल कायम की जिस पर प्रशासन ने सम्मानित किया। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विकास होता रहा है और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना भी रोजगारोपयोगी पाठ्यक्रमों को उपलब्ध कराने की गई है। श्री गंगाजली शिक्षण समिति ने श्री मिश्रा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के प्रसार का बीड़ा उठाया है।आज 15000 हजार से भी अधिक विधार्थी लाभान्वित हो रहें है।
शैक्षणिक जगत के साथ ही वे धार्मिक एवं आध्यात्मिक सेवा कार्यों से भी सतत रूप से जुड़े हैं।उन्होंने श्री हनुमान मंदिर सनातन धर्म ट्रस्ट सेक्टर 2 भिलाई की स्थापना की है।जो दर्शनीय है। सेक्टर 6 में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर,सेक्टर 4 में श्री जगन्नाथ मंदिर, साई मंदिर आदि से भी वे जुड़े हैं। वे सोसाइटी फॉर एनवायरनमेंट एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट के द्वारा अपने सामाजिक दायित्वों का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रहें हैं। भिलाई में हैंड़वाल क्लब के संस्थापक के रूप में उनका योगदान प्रेरणादायक है। कई अंतराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े होने के साथ ही 2019 में शासन ने शिक्षा क्षेत्र में कार्य हेतु छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान प्रदान किया है। इसके अलावा भी विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है जिसकी लंबी श्रृंखला है। शिक्षाविद आई पी मिश्रा से हमने वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य पर कुछ सवाल पूछे जिनका उन्होंने बड़ी गंभीरता और स्पष्टता से दिया।
सवाल : आपने शिक्षा जगत को ही अपना कार्य क्षेत्र क्यों चुना ?
जवाब : जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्व होता है।शिक्षा और ज्ञान न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक हैं बल्कि यह राष्ट्र के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा एक व्यक्ति की सोच का पोषण करती है और जीवन में कार्य करने,आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करती है। मैने अपनी शिक्षा के बदौलत ही भिलाई स्टील प्लांट के विभिन्न विभागों में तीन से अधिक दशकों तक कार्य किया है।योजनाएं बनाना और उन्हें मूर्त रूप में परिणित करना तभी संभव हो पाया है। मुझे लगा कि इस अंचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है,यदि शिक्षा की उपलब्धता और विस्तार हो जाए तो विकास के रास्ते खुल जाएंगे।
सवाल : अपने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर ही विशेष फोकस किया है?
जवाब : स्कूल शिक्षा के अंतिम पड़ाव यानी 12 वीं के बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब यह निर्णय लेना होता है कि किस क्षेत्र में करियर बनाना है। वैसे 10 वीं के बाद ही स्ट्रीम का चयन करना होता है। ऐसे में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा वह पड़ाव है जहां प्रशिक्षण और कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हम कह सकते हैं कि स्कूल की ताजा कच्ची मिट्टी को तराश कर सुंदर आकार देना ही उच्च शिक्षा का आधार है। हम युवा वर्ग को एक सही दिशा दे और रोजगार के लायक तैयार कर सकें। उच्च तकनीकी ज्ञान उपलब्ध करा सकें जिससे वो वर्तमान प्रतिस्पर्धा में कामयाब हो सकें। मैने भी यही सोच कर श्री गंगाजली शिक्षण समिति की स्थापना की जिसके अंतर्गत विभिन्न स्ट्रीम के महाविद्यालय संचालित हैं।
सवाल : डिग्री हासिल करके युवा वर्ग रोजगार के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है।इस दिशा में आप क्या सोचते हैं?
जवाब : यह सही है कि आज बेरोजगारी की बड़ी विकराल स्थिति है। किंतु यह भी सत्य है कि कौशल विकास और प्रशिक्षण के जरिए काफी हद तक रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमारी संथाओं में फार्मेसी, नर्सिंग, प्रबंधन, मेडिकल के ऐसे पाठ्यक्रम है जो सीधे रोजगार, स्वरोजगार से जुड़े हैं।हमें युवा पीढ़ी को इस काबिल बनाना है की वे रोजगार देने लायक बन सकें। केवल सरकारी नौकरी के भरोसे न रहें अपने पैरों पर खड़े हो कर विकास कर सकें। इसके लिए मेरी संस्थाएं सतत रूप से प्रयास करती हैं।
सवाल : मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र मेभी आपकी संस्था ने प्रवेश किया हैऔर बड़ा हॉस्पिटल भी संचालित है आपकी क्या योजना है इस दिशा में ?
जवाब : चिकित्सा शिक्षा के लिए हमारे विधार्थियों को शासकीय महाविद्यालय के अलावा कोई विकल्प नहीं था, या तो उन्हें दूसरे प्रदेश जाना पड़ता या अपना रास्ता बदलना होता था। मेरी इच्छा उच्च स्तर का मेडिकल कॉलेज और सर्व सुविधायुक्त हॉस्पिटल आम जनता के लिए उपलब्ध कराना था, उसी दिशा में सार्थक प्रयास किया गया है। हमारा दूसरा अभिषेक मिश्रा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज भी शीघ्र शुरू होगा।जिससे नागरिकों को भी चिकित्सा सुविधा मिलेगी और विधार्थियों को भी शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलेगा।
सवाल : निजी शैक्षणिक संस्थाओं को कौन कौन सी चुनौतियां का सामना करना पड़ता है?
जवाब : बहुत सी चुनौतियां हैं। अधोसरंचना विकास से लेकर शैक्षणिक एवं अ शैक्षणिक मानव संसाधन की उपलब्धता बड़ी चुनौती रहती है। आर्थिक भार के साथ ही समय के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का दायित्व भी है जो हमारा बेंचमार्क निर्धारित करता है। हम इस दिशा में लगातार कार्य करते हुए सफल हुए हैं। आज श्री शंकराचार्य समूह की संस्थाएं अपनी पहचान बना चुकी हैं। विधार्थियों का फीड बैक हमारे विकास का आधार होता है।
सवाल : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस सत्र से लागू की जा रही है।इस पर आपके क्या विचार हैं?
जवाब : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा के लिए बहुविषयक मार्ग उपलब्ध हैं। व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को जोड़ कर इंटर्नशिप को शामिल किया गया है, वहीं कौशल विकास पर जोर दया गया है। ये ठीक भी है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जी ई आर) बढ़ाने की चुनौती भी है जिसे पूरा करना है। आर्थिक सहायता और संसाधनों की उपलब्धता से बड़ी जरूरत की पूर्ति होगी। शिक्षक छात्र अनुपात को भी संतुलित करना होगा। विधार्थी को नए तकनीकी ज्ञान से अपडेट रहना होगा जो उनके कौशल पर निर्भर होगा जिससे उनका विकास और आर्थिक प्रगति भी होगी।
सवाल : भिलाई की शैक्षणिक प्रगति से आप संतुष्ट हैं?
जवाब : यह बहुत अच्छी बात है कि भिलाई को एजुकेशन हब के रूप में पहचाना जाता है।हर साल हजारों बच्चे दूर दूर से यहां पढ़ने आते हैं। हमारे लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है की हमारी संस्थाएं ऐसा मिल का पत्थर हैं जहां से उचें शिखर और विधार्थियों का उज्ज्वल भविष्य दिखाई देता है। हमारे यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है और हम सब का प्रयास इसे सुदृढ़ और मजबूत बनाएगा। अभी और विकास की संभावनाएं बनी हुई है यह तो सतत विकास की प्रक्रिया है।

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