छत्तीसगढ़बलौदा बाजार

नेत्रदान महादान: रोहिणी वर्मा ने जाते-जाते दो जिंदगियों में भर दी रोशनी

बलौदा बाजार (विश्व परिवार)। “जिंदगी खत्म हुई, लेकिन किसी और की दुनिया रोशन करने का रास्ता छोड़ गईं”, बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ब्लॉक के जरहागांव से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. यहां दिवंगत रोहिणी वर्मा के परिजनों ने उनका नेत्रदान कराया. इस एक फैसले से अब दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद जगी है।
अंतिम विदाई से पहले लिया बड़ा फैसला
रोहिणी वर्मा के परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा और मानव सेवा की भावना का सम्मान करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया. परिवार का यह निर्णय कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक व्यक्ति का नेत्रदान दो नेत्रहीन लोगों को नई दृष्टि देने में सहायक हो सकता है।
चिकित्सकों की टीम ने पूरी की प्रक्रिया
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी, खंड चिकित्सा अधिकारी भाटापारा डॉ. राजेंद्र माहेश्वरी तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा माहेश्वरी के मार्गदर्शन में नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।
परिवार ने दिया समाज को बड़ा संदेश
रोहिणी वर्मा के परिजन मोतीराम वर्मा, हरिकिशन वर्मा और पूना राम वर्मा सहित पूरे परिवार ने सक्रिय सहयोग किया. सबसे खास बात यह रही कि इस अवसर पर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी भविष्य में स्वयं नेत्रदान करने का संकल्प लिया. उनका कहना था कि यदि उनके इस निर्णय से किसी की अंधेरी दुनिया में उजाला आ सकता है तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं।
नेत्रदान महादान है
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान माना जाता है. मृत्यु के बाद किया गया यह दान दो नेत्रहीन व्यक्तियों को देखने की क्षमता दे सकता है. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने परिवार के साथ बैठकर नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए. मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन दान किए गए नेत्र किसी और की दुनिया रोशन कर सकते हैं।
राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नेत्रदान भी शामिल है. जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो सूचना मिलने पर नेत्रदान लिया जाता है. यह प्रक्रिया 6 घंटे में पूरी होती है. जरहागांव में रोहिणी वर्मा के घर से भी सूचना मिलने पर हमारी टीम पहुंची. नेत्र सहायक अधिकारी वहां पहुंचीं और टीम के साथ सावधानीपूर्वक प्रक्रिया की गई. फिर रायपुर के मेकाहारा हॉस्पिटल भेजा गया.यह उन मरीजों के कार्निया बदलने में उपयोग होता है. यह प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे मरीज को दिखाई देने लग जाता है. एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस आ जाती है- डॉ. राजेश अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराना जरूरी है. 6 घंटे बाद कार्निया खराब हो जाती है. वहीं कुत्ता काटने से या केंसर से या हेपेटाइटिस से मौत होने पर नेत्रदान नहीं किया जा सकता है, बाकि सभी लोग नेत्रदान कर सकते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में नेत्रदान को लेकर फैली झिझक और भ्रांतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी का कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं तो हजारों दृष्टिबाधित लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है।
एक निर्णय, दो जिंदगियों में उजाला
रोहिणी वर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका यह निर्णय दो ऐसे लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण लेकर आएगा, जिन्होंने शायद वर्षों से रोशनी का इंतजार किया है. जरहागांव से आई यह पहल सिर्फ नेत्रदान की खबर नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का ऐसा संदेश है, जो हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन किसी और के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक हों और अपने परिवार के साथ इस महादान का संकल्प लें, क्योंकि किसी की आंखें बंद होने के बाद भी, किसी और की आंखों में नई सुबह जगाई जा सकती है।

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