- विद्यार्थियों ने तप, त्याग और संयम के संकल्पों से लगाई धार्मिक बोलियां
कुम्हारी (विश्व परिवार)। विचक्षण जैन विद्यापीठ, कुम्हारी में पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर भगवान महावीर स्वामी का ‘जन्म वांचन’ अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे भाव-समर्पण के साथ सहभागिता की।
विचक्षण जैन विद्यापीठ के महामंत्री सी ए विजय मालू जी ने बता की समारोह का मुख्य आकर्षण जन्म वाचन की अनूठी बोलियां रहीं। परंपरागत भौतिक बोलियों से इतर, विद्यार्थियों ने अपने जीवन में तप, त्याग, संयम और धार्मिक नियमों को अपनाने की आध्यात्मिक बोलियां लगाईं। विद्यार्थियों ने इन संकल्पों को निर्धारित अवधि से लेकर आजीवन निभाने का पचखाण ग्रहण किया। कार्यक्रम परम पूज्या बस्तर प्रहरी श्री राजेश श्री जी म सा आदि ठाना की निश्रा में संपन्न हुआ ।
विभिन्न धार्मिक बोलियों में छात्रों का उत्साह दिखा :-
श्रीसंघ को तिलक लगाने की बोली
इस बोली के अंतर्गत 3 से 6 माह तक 2 वर्ष तक पटाखों का त्याग तथा महीने में 5 बार केवल 5 द्रव्यों से भोजन करने का नियम लिया गया।
लाभार्थी: सृष्टि नाहर (12वीं), संचिता जैन (12वीं), हर्ष चोपड़ा (11वीं) एवं तेजस सुराना (11वीं)।
मुनीमजी की बोली
प्रतिदिन 20 मिनट धार्मिक पुस्तक का अध्ययन करने का नियम 3 से 6 माह के लिए लिया गया।
लाभार्थी: मौलिक भंसाली (11वीं)।
पालना जी की आरती
3 से 6 माह तक प्रतिदिन परमात्मा की पूजा करने का संकल्प लिया गया।
लाभार्थी: विनस मुसरफ (12वीं), संचिता जैन (12वीं), उत्कर्ष जैन (8वीं), पार्श्व जैन (8वीं), हर्ष जैन (11वीं) एवं मौलिक भंसाली (11वीं)।
परमात्मा को चंवर करने की बोली
3 से 6 माह तक महीने में कम से कम 8 दिन तिविहार करने का नियम लिया गया।
लाभार्थी: डिम्पी जैन (9वीं), परिधि जैन (8वीं), श्रेयांश जैन (9वीं), अरिहंत कोचर (9वीं), जिनित जैन (9वीं) एवं आरुष डागा (9वीं)।
जन्म होने पर घंटनाद की बोली
3 से 6 माह तक धार्मिक स्थान की सार-संभाल करने का संकल्प लिया गया।
लाभार्थी: चिराग जैन (12वीं)।
पालना जी की बोली
प्रतिदिन परमात्मा का अभिषेक/पक्षाल करने का नियम 3 से 6 माह के लिए लिया गया।
लाभार्थी: मोक्ष जैन (10वीं), संभव जैन (10वीं), मौलिक (11वीं), सोम्य कोचर (11वीं), हितार्थ जैन (10वीं) एवं कशिश सोलंकी (10वीं)।
चौदह स्वप्नों की बोलियां भी ली गईं
भगवान महावीर स्वामी के जन्म से जुड़े चौदह शुभ स्वप्नों की बोलियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने विभिन्न धार्मिक नियमों को अपनाने का संकल्प लिया।
प्रथम स्वप्न – हाथी: 3 से 6 माह तक परमात्मा के गुणों का चिंतन।
लाभार्थी – कुमकुम जैन (11वीं), सुप्रिया बनिक (11वीं), कशिश सोलंकी (10वीं), रिद्धि भंसाली (6वीं)।
द्वितीय स्वप्न – वृषभ: प्रतिदिन गाय को 4 रोटी खिलाने का नियम।
लाभार्थी – उत्कर्ष जैन (8वीं)।
तृतीय स्वप्न – सिंह: आजीवन नॉन-वेज का त्याग करने का संकल्प।
लाभार्थी – गौतम जैन (7वीं), अरिष्ट जैन (8वीं), उत्कर्ष (8वीं), वेदांत जैन (7वीं), चिराग बाफना (9वीं), राज जैन (5वीं), संस्कार जैन (7वीं), नीरल जैन (7वीं), मोक्ष जैन (7वीं), उन्नति जैन (8वीं), केसर जैन (8वीं), दीक्षा जैन (7वीं), नव्या जैन (9वीं) एवं अतिशा जैन (9वीं)।
चतुर्थ स्वप्न – लक्ष्मी: प्रतिदिन ₹5 का दान करने का नियम।
लाभार्थी – गौतम जैन (7वीं), श्रेयांश जैन (9वीं), हर्षित छाजेड़ (12वीं), दिशा पारख (11वीं), हर्षिता पारख, मोक्ष बोहरा (10वीं), अक्षत जैन (11वीं), कुणाल चोपड़ा (10वीं), जैनम बाफना (11वीं), मौलिक झाबक (11वीं) एवं अरिष्ट बैद (10वीं)।
पंचम स्वप्न – पुष्पमाला: महीने में नवकार मंत्र की 10 माला गिनने का नियम।
लाभार्थी – पार्श्व जैन (8वीं), तनिष्क जैन (5वीं), दिव्यांश जैन (5वीं), उन्नति जैन (9वीं), दीक्षा जैन (7वीं), कुशाल जैन (10वीं) एवं कुनाल जैन (10वीं)।
छठवां स्वप्न – चंद्रमा: 6 माह में राई-देवसी प्रतिक्रमण कंठस्थ करने का संकल्प।
लाभार्थी – खुशाल सुराना (7वीं), अरिष्ट जैन (7वीं), कृतिका राकेचा (10वीं), प्रियल जैन (10वीं) एवं सिद्धि जैन (10वीं)।
सप्तम स्वप्न – सूर्य: हिंसक गेम न खेलने का नियम।
लाभार्थी – संजना जैन (8वीं), डिम्पी जैन (9वीं), परिधि अग्रवाल (9वीं), डॉली जैन (10वीं), श्रेया जैन (12वीं), सुप्रिया जैन (11वीं), अंशिका जैन (12वीं), लियान भंसाली (4वीं), मौलिक झाबक (11वीं), दर्शन जैन (6वीं), युग जैन (11वीं), सोम्य कोचर (11वीं), अरिहंत कोचर (9वीं), हितार्थ जैन (10वीं), श्रेयांश जैन (9वीं), भव्य जैन (10वीं) एवं रिषित चोरड़िया (11वीं)।
अष्टम स्वप्न – ध्वजा: 5 लोगों को धर्म से जोड़कर धर्म की प्रभावना करने का संकल्प।
लाभार्थी – कशिश सोलंकी (10वीं), समृद्धि जैन (11वीं), तनिष लुनावत (5वीं), दिव्यांश खिलोशिया (6वीं) एवं खुशाल सुराना (7वीं)।
नवम स्वप्न – पूर्ण कलश: प्रतिदिन 20 मिनट ध्यान करने का नियम।
लाभार्थी – सुप्रिया बनिक (11वीं), सृष्टि बैद (11वीं), कशिश सोलंकी (10वीं), श्रेया जैन (10वीं), हर्षिता पारख, विशेष छाजेड़ (11वीं), अरिहंत कोचर (9वीं), पार्श्व जैन (8वीं), हर्ष चोपड़ा (11वीं) एवं कमलेश्वरी दीदी।
दशम स्वप्न – पद्म सरोवर: प्रतिदिन थाली धोकर पीने का नियम।
लाभार्थी – तनिष लुनावत (5वीं), सिद्धि जैन (6वीं), लियान भंसाली (4वीं) एवं संस्कार जैन (7वीं)।
ग्यारहवां स्वप्न – क्षीर समुद्र: प्रतिदिन धोवन या गर्म पानी पीने का नियम।
लाभार्थी – खुशाल सुराना (7वीं) एवं दीक्षा जैन (7वीं)।
बारहवां स्वप्न – देव विमान: माह में 5 दिन डेयरी प्रोडक्ट का त्याग करने का संकल्प।
लाभार्थी: हर्षित छाजेड़।
तेरहवां स्वप्न – रत्नों की राशि: अपनी सामग्री अथवा पैसे का 2 प्रतिशत प्रतिमाह दान करने का नियम।
लाभार्थी – श्रेयांश जैन (9वीं), अरिष्ट बैद (10वीं), प्रिंस पारख (11वीं), उन्नति जैन (9वीं), दीक्षा जैन (9वीं) एवं हर्षित छाजेड़ (12वीं)।
चौदहवां स्वप्न – निर्धूम अग्नि: प्रतिदिन कम से कम एक व्यक्ति की प्रशंसा करने का संकल्प।
लाभार्थी – गौतम मूणत (7वीं), वेदांत जैन (7वीं), विशेष जैन (11वीं), खुशाल सुराना (7वीं), श्रेयांश जैन (9वीं), अरिष्ट जैन (7वीं), तनिष लुनावत (5वीं), राज जैन (5वीं), संजना जैन (8वीं), विनस जैन (12वीं), संचिता जैन (12वीं), डॉली जैन (10वीं), अनन्या (10वीं), अवंतिका (5वीं), परिधि अग्रवाल (9वीं), केसर जैन (8वीं), तमन्ना पटेल (11वीं), श्रेया जैन (9वीं), आदि कोचर (12वीं) एवं अरिष्ट बैद (10वीं)।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों में धार्मिक भावना, तप, त्याग एवं संयम के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला। जन्म वाचन की इन बोलियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्युषण पर्व की मूल भावना—आत्मशुद्धि, संयम, सेवा, दान एवं धर्म प्रभावना—को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों द्वारा लिए गए इन संकल्पों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में ऋषभ जी कोटड़िया एवं दीपाली जी जैन उपस्थित थे ।







