जगदलपुर (विश्व परिवार)। बस्तर में आई बाढ़ से मकान ढहने और हजारों किसानों की फसल बर्बाद होने के बाद अब मुआवजे की मांग तेज हो गई है। गुरुवार को हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने कांग्रेसजनों के साथ मिलकर शहर में रैली निकालकर जमकर नारेबाजी की और कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जमीन पर बैठ गए। प्रदर्शन में महिला, पुरुष और युवा सहित सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। किसान अपने साथ बर्बाद फसल भी लेकर पहुंचे, ताकि प्रशासन को नुकसान की तस्वीर दिखाई जा सके।
प्रदर्शन में शामिल रहे कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावितों के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। किसानों को प्रति एकड़ 65 हजार रुपये मुआवजा देने, कच्चे मकान के लिए 3 लाख, पक्के मकान के लिए 5 लाख और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1 लाख रुपये देने की मांग की गई है। बाढ़ में बह गए मवेशियों के लिए 60 हजार रुपये और खेती के लिए लिए गए केसीसी ऋण की माफी की भी मांग उठाई गई।
उन्होंने कहा कि सरकार मांगें पूरी नहीं करती है तो आने वाले दिनों में ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा और इसके बाद कलेक्ट्रेट के सामने दिन-रात अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। वहीं किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दयाराम कश्यप ने चेतावनी दी कि 10 दिन बाद ट्रैक्टरों के जरिए पूरे जगदलपुर शहर को जाम किया जाएगा।
उन्होंने सरकार की राहत योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक एकड़ में फसल की कटाई और मिंजाई सहित कामों पर करीब 8 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि किसानों को मिलने वाली राहत राशि नुकसान के मुकाबले नाकाफी है। किसानों का कहना है कि जब सरकार 21 क्विंटल धान खरीदी की बात करती है, तो बाढ़ से बर्बाद हुई फसल के नुकसान की भरपाई भी उचित तरीके से होनी चाहिए।
दूसरी ओर अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने बताया कि राजस्व अमले के सर्वे के आधार पर मकान क्षति के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जा चुकी है। फसल क्षति का आकलन अभी जारी है और 50 लाख रुपये प्रभावितों के खातों में पहुंच चुके हैं। किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को राज्यपाल तक पहुंचाया जाएगा।
अब सवाल यह है कि बाढ़ से तबाह हुए किसानों और परिवारों को उनकी मांग के मुताबिक राहत कब मिलेगी? फिलहाल किसानों ने सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर ट्रैक्टरों से शहर बंद करने और इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई है।








