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प्रतिस्पर्धात्मक युग में आंतरिक शांति की खोज: शांति सरोवर में ध्यान एवं तनाव प्रबंधन कार्यक्रम का सफल आयोजन

रायपुर (विश्व परिवार) आज के तीव्र प्रतिस्पर्धात्मक दौर में बढ़ता हुआ तनाव मानव जीवन को भीतर से प्रभावित कर रहा है। इसका असर केवल कार्यक्षमता पर ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों पर भी पड़ रहा है। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों के सर्वांगीण विकास हेतु शांति सरोवर में N. H. Goel World School के लिए ध्यान एवं तनाव प्रबंधन विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के हार्दिक स्वागत से हुई। इसके पश्चात् ब्रह्माकुमारी सिस्टर अदिति ने एक प्रेरक आइस-ब्रेकिंग गतिविधि करवाई, जिससे वातावरण सकारात्मक और ऊर्जावान बन गया। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्था के उद्देश्य एवं कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

तनाव प्रबंधन सत्र के दौरान वक्ता ने बताया कि तनाव क्या है, इसके मुख्य कारण क्या हैं तथा किस प्रकार हमारे विचार ही हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा — “जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही हम बन जाते हैं।” उन्होंने मानसिक लक्षणों जैसे चिंता, नकारात्मकता, चिड़चिड़ापन तथा शारीरिक लक्षणों जैसे थकान और बेचैनी के बारे में विस्तार से समझाया।

उन्होंने जीवन में आने वाली प्रत्येक परिस्थिति को सहज भाव से स्वीकार करने और ईश्वर का धन्यवाद करने की प्रेरणा दी। ‘गिविंग हैबिट’ विकसित करने, हर परिस्थिति में उत्साहित रहने और सफलता की प्रबल इच्छा रखने का संदेश दिया गया। एडमंड हिलेरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से विजय प्राप्त की जा सकती है।

एक विशेष आत्म-मूल्यांकन गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने विचारों की सकारात्मकता एवं जिम्मेदारी का मूल्यांकन करने का अवसर मिला। उन्होंने संदेश दिया कि यदि हम स्वयं से प्रेम करेंगे और प्रसन्न रहेंगे, तो अपने आसपास के लोगों को भी प्रसन्न रख पाएँगे। “अच्छा देखो, अच्छा बोलो और शांत रहो” — यही जीवन का मूल मंत्र बताया गया।

कार्यक्रम के दौरान सामूहिक पुष्टि (अफर्मेशन) करवाई गई —
“मैं एक अनोखी आत्मा हूँ।
मैं एक पूर्ण आत्मा हूँ।
मैं एक शांत आत्मा हूँ।
मैं एक प्रेममयी आत्मा हूँ।
मैं एक सौभाग्यशाली आत्मा हूँ।”

इसके पश्चात ब्रह्माकुमारी सिस्टर रश्मि द्वारा ध्यान सत्र कराया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने गहन शांति और आत्मिक अनुभव की अनुभूति की।

कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, रायपुर प्रभारी, ने आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आध्यात्मिकता के माध्यम से देवत्व गुणों का विकास किया जा सकता है और एक श्रेष्ठ मानव का निर्माण संभव है। उन्होंने संस्था को एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के रूप में बताया, जहाँ आंतरिक सौंदर्य और चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती है।

इस अवसर पर सविता दीदी ने निदेशक प्रशासन श्री एस. के. तोमर एवं प्राचार्य डॉ. अविनाश पांडेय का दिव्य उपहारों के साथ स्वागत किया। दोनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहाँ आकर उन्हें अत्यंत शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई।

अंत में सभी को आशीर्वाद कार्ड एवं प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम ने सभी के मन में आध्यात्मिक जागरूकता, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण का दीप प्रज्वलित कर दिया।

यह कार्यक्रम केवल एक सत्र नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन की एक प्रेरणादायक यात्रा सिद्ध हुआ।

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