रायपुर (विश्व परिवार)। अग्रणी सामाजिक व साहित्यिक संस्था वक्ता मंच एवं जन एकता फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आज राजधानी के वृन्दावन सभागृह में संपन्न काव्य गोष्ठी में 45 से अधिक कवियों ने प्रभावी प्रस्तुति दी। गोष्ठी की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री आशा साहू थीं। वरिष्ठ पत्रकार पं. पी.के. तिवारी ने आयोजन की अध्यक्षता की। साहित्यकार सीमा पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी एवं समाजसेविका ज्योति शुक्ला विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते ने जानकारी दी कि काव्य समागम में हिंदी, उर्दू एवं छत्तीसगढ़ी में प्रभावी प्रस्तुतियों के माध्यम से कवियों ने खूब वाहवाही लूटी। प्रमुख प्रस्तुतियां इस प्रकार रहीं—
कमलेश साहू, सरोरा:
धान के कटोरा जिन्हा जुरमिल के सब रहिथे,
मैं ऊंहा के रहईया आंव, जेन ल छत्तीसगढ़ कहिथे।
दुष्यंत साहू, डूंडा:
कहां मोर गाँव संगी कहां मोर गाँव,
जिहा कौंवा के काँव, चिरई के चांव।
बिना रुख के कहाँ मिलही अब छाँव,
कहां मोर गाँव संगी कहां मोर गाँव।
सुनीता वैष्णव, रायपुर:
कविताएं मुझमें पलती हैं,
या मैं कविताओं में।
कभी सुहानी भोर में,
कभी पंछियों के शोर में।
अमित चौहान, रायपुर:
जैसी संगत बैठिये, वैसी ही मति होय,
चंदन को छूकर भला नीम न चंदन होय।
माटी का यह तन यहां माटी में मिल जाय,
संतोषी जो मन रखे वही परम सुख पाय।
सुषमा प्रेम पटेल, रायपुर:
पोज मार-मारकर फोटो खिंचवाया खूब,
योगा डे मनाने वास्ते कालीन बिछाया है।
स्टेटस में डालने को एक दिन सुबह से उठ गए,
मोटापा के बोझ तले जीवन बिताया है।
एस.एन. जोशी, रायपुर:
गर ये कुफ्र है तो है, रोज ही करता हूँ मैं,
सच तो सच है कहने से नहीं डरता हूँ मैं।
फांसी पे चढ़ा दो फिर भी मैं यही कहूंगा,
रब से ज्यादा अपनी मां से प्यार करता हूँ मैं।
विजया ठाकुर, रायपुर:
कान्हा तेरे धाम में यमुना है बेहाल,
नीला अम्बर रो रहा, धरा हुई कंगाल।
रूठी हरियाली लगे सहे प्रदूषण मार,
घुट-घुट सांसें हो रही, जीना हुआ मुहाल।
डॉ. रत्ना पाण्डेय, रायपुर:
मोक्ष वही है जहां शांति का वास हो,
प्राणी मात्र में अपनत्व का विश्वास हो।
जहां पर आत्मा परमात्मा से एकाकार हो,
आकर्षण के प्रति निर्लिप्तता का भाव हो।
काव्य समागम में आशा साहू, पं. पी.के. तिवारी, सीमा पांडेय, राजकुमार धर द्विवेदी, ज्योति शुक्ला, राजेश पराते, शुभम साहू, विवेक बेहरा, डॉ. रत्ना पाण्डेय, एन.पी. विश्वकर्मा ‘तृण’, विजय कुमार कोसले, चंद्रा वैष्णव, राजाराम रसिक, लक्ष्मीकांत वैष्णव, दुष्यंत साहू, देव मानिकपुरी, मयूराक्षी मिश्रा, डॉ. मन्नूलाल चेलक, लक्ष्मण दास, संजय देवांगन, सुनीता वैष्णव, संगीता निर्मलकर, राजेंद्र रायपुरी, छबिलाल सोनी, अपूर्व तिवारी, तामेश्वर साहू, एस.एन. जोशी, बलजीत कौर, नंदिनी लहेजा, लोकनाथ साहू, दिव्या वर्मा, डॉ. सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव, नरेंद्र कुमार साहू, पोषण पटेल, दिलीप टिकरिहा, मन्नूलाल यदु, सुषमा पटेल, रुनाली चक्रवर्ती, कल्याणी तिवारी, कुमार जगदली, रश्मि चौहान, अमित कुमार चौहान, हर्षलता मिश्रा, विजया ठाकुर, कमलेश साहू, भावना साहू सहित 45 से अधिक कवियों ने काव्य पाठ किया।
काव्य समागम का प्रभावी संचालन वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते ने किया। दोनों आयोजक संस्थाओं वक्ता मंच एवं जन एकता फाउंडेशन की ओर से शुभम साहू द्वारा प्रस्तुत आभार प्रदर्शन के साथ आयोजन संपन्न हुआ।







