रायपुर (विश्व परिवार)। ICAR-National Institute of Biotic Stress Management द्वारा 13 मई 2026 को अपने रायपुर स्थित परिसर में “उर्वरकों के कुशल उपयोग एवं बायो-रिसोर्स सेंटर के प्रोत्साहन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम PRADAN के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के सदस्यों को संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में लगभग 30 एफपीओ सदस्यों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में डॉ. पी.के. राय ने संबोधित करते हुए कहा कि सतत कृषि के लिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना और मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
इस प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी डॉ. ए. अमरेंदर रेड्डी रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. रेड्डी द्वारा किया गया, जबकि सह-समन्वय डॉ. के.सी. शर्मा, डॉ. पी. मूवेंथन और डॉ. प्रियंका मीणा ने किया। फील्ड विजिट और लॉजिस्टिक व्यवस्था में डॉ. कृति अर्पणा मिंज का सहयोग रहा।
तकनीकी सत्रों के दौरान डॉ. एस.के. शर्मा ने सायनोबैक्टीरिया आधारित बायोफर्टिलाइजर और उनकी भूमिका पर व्याख्यान दिया। वहीं, भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेंद्र परमार ने कृषि में उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग पर जानकारी साझा की। BASIX के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पवन कुमार ने उर्वरक प्रबंधन के प्रभावी तरीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ बायो-रिसोर्स सेंटर की भूमिका पर चर्चा की, जो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण के तहत प्रतिभागियों को संस्थान के फार्म में मूंग फसल के खेत का भ्रमण कराया गया, जहां ड्रोन के माध्यम से कृषि कार्यों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने खास रुचि के साथ देखा।
कार्यक्रम का समापन इंटरएक्टिव फीडबैक सत्र एवं प्रशिक्षण सामग्री वितरण के साथ किया गया।







