(विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के वनांचलों से लेकर शहरों की गलियों तक, अगले कुछ महीनों में एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव दस्तक देने वाला है। भारत की आगामी जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की योजनाओं का आधार स्तंभ बनने जा रही है। इस बार की जनगणना अपनी पारंपरिक पहचान को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल अवतार में नजर आएगी, जिससे छत्तीसगढ़ के विकास को एक नई गति मिलने की उम्मीद है।
पहली बार ‘डिजिटल अवतार’ में जनगणना
अब वो दौर गया जब प्रगणक बड़े-बड़े रजिस्टर लेकर घर-घर पहुंचते थे। जनगणना 2027 देश की पहली ‘कागज रहित’ या डिजिटल जनगणना होगी। छत्तीसगढ़ में इसके लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। प्रगणक अब हाथों में स्मार्टफोन और विशेष रूप से तैयार मोबाइल ऐप लेकर पहुंचेंगे। इस डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बस्तर के सुदूर गांवों से लेकर सरगुजा की पहाड़ियों तक का डेटा रियल-टाइम में सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे इंसानी गलतियों की गुंजाइश कम होगी और डेटा अधिक सटीक रूप में उपलब्ध होगा।
छत्तीसगढ़ में दो चरणों का महाभियान
राज्य में इस महाअभियान को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है:
मकानसूचीकरण (First Phase): इसकी शुरुआत 1 मई से 30 मई 2026 के बीच होगी। इससे पहले 16 अप्रैल से स्व-जनगणना की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, जिसे नागरिकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
जनसंख्या गणना (Second Phase): मुख्य जनगणना फरवरी 2027 में होगी, जिसे मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।
‘स्व-जनगणना’ में बढ़ता उत्साह: नागरिक बन रहे डिजिटल भागीदार
इस बार की सबसे बड़ी खासियत ‘स्व-जनगणना’ (Self-Enumeration) है। छत्तीसगढ़ में यह प्रक्रिया शुरू हुए आठ दिन से अधिक समय हो चुका है और लोगों में इसे लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में नागरिक ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर रहे हैं, अपनी जानकारी भर रहे हैं और सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट भी कर रहे हैं।
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद नागरिकों को एक ‘SE ID’ प्राप्त होती है। जब प्रगणक घर पहुंचेगा, तो नागरिक केवल यह आईडी साझा कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी। यह सुविधा पूरी तरह स्वैच्छिक है। जो लोग ऑनलाइन जानकारी दर्ज नहीं कर पाएंगे, उनके घर प्रगणक जाकर आवश्यक विवरण एकत्र करेंगे।
33 सवालों में छिपी है खुशहाली की चाबी
मकानसूचीकरण के दौरान प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। ये सवाल केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अगली पीढ़ी की जरूरतों को समझने का जरिया हैं। इसमें घर की बनावट, पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय की सुविधा और परिवार के पास मौजूद संसाधनों (जैसे मोबाइल, इंटरनेट, वाहन) की जानकारी ली जाएगी। सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय करेगी कि प्रदेश के किन इलाकों में नए स्कूल, अस्पताल या सड़कों की जरूरत है।
सुरक्षा और गोपनीयता: आपका डेटा है ‘अमानत’
अक्सर लोगों के मन में डेटा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते हैं। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिकों की जानकारी पूरी तरह गोपनीय है। इस डेटा का उपयोग किसी पुलिस जांच, इनकम टैक्स या अदालती कार्यवाही में नहीं किया जा सकता। यह केवल विकास की योजनाएं बनाने के लिए इस्तेमाल होगा।
मैदान में तैनात 62 हजार ‘विकास सारथी’
छत्तीसगढ़ जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र में इस कार्य को अंजाम देने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक टीम तैयार की गई है। राज्य के 33 जिलों और 20 हजार गांवों में डेटा जुटाने के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं, जिन्हें आधुनिक ऐप चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
आम आदमी के लिए क्यों है जरूरी?
‘हमारी जनगणना – हमारा विकास’ का संदेश यह बताता है कि यह डेटा आपके हक की लड़ाई लड़ने में मदद करता है। सटीक आंकड़ों से ही छत्तीसगढ़ को केंद्र से मिलने वाले बजट और संसाधनों का सही हिस्सा मिलता है। चाहे वह अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाएं हों या शहरी गरीबों के लिए आवास, सब कुछ इसी गणना पर निर्भर है।
प्रशासन ने किसी भी शंका के समाधान के लिए टोल-फ्री नंबर 1855 जारी किया है। याद रखें, जनगणना में आपकी सही भागीदारी ही ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ के सपने को साकार करेगी। अब जबकि स्व-जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नागरिक सक्रिय रूप से इसमें भाग ले रहे हैं, यह डिजिटल महाअभियान राज्य के विकास की नई दिशा तय करने की ओर बढ़ रहा है।





