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विधानसभा में उठा महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय का मुद्दा, भर्ती और नई शिक्षा नीति पर सरकार ने दिया जवाब

रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र की शुरुआत आज से हो गई है। पहले दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने, विश्वविद्यालय में रिक्त पदों पर भर्ती और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से सवाल किए।
महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जवाब
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सदन में बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में भर्ती से संबंधित वर्तमान में किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
इस पर विधायक लता उसेंडी ने पूछा कि जब उत्तर में मामले के निराकरण की बात कही गई है, तो विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड की कक्षाएं क्यों संचालित नहीं हो रही हैं। जवाब में मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अभी बीएड और डीएड के नए पाठ्यक्रम शुरू नहीं किए गए हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत इन पाठ्यक्रमों को चार वर्षीय स्वरूप में संचालित किया जाएगा।
नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर सवाल-जवाब
लता उसेंडी ने आगे पूछा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रदेश के किन-किन विश्वविद्यालयों में लागू की गई है और क्या महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में भी इसे लागू किया गया है। इस पर मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में लागू है और महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय भी इससे अछूता नहीं है।
हालांकि, विधायक उसेंडी ने दावा किया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है। इस पर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय प्रदेश का एक महत्वपूर्ण विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं को देखते हुए नया सांख्यिकी विभाग खोला जा रहा है तथा संस्थान ने आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू भी किया है।
रिक्त पदों और भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
विश्वविद्यालय में रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए लता उसेंडी ने कहा कि विश्वविद्यालय में कुल 265 पद स्वीकृत हैं, लेकिन नियुक्तियां बहुत कम हुई हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया और उसकी जांच कराने वाली एजेंसी के संबंध में भी जानकारी मांगी।
मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुल 31 विभागों में से अभी पांच विभाग प्रारंभ नहीं हुए हैं। 146 पदों के विरुद्ध 113 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतें वर्तमान भर्ती से संबंधित नहीं, बल्कि पूर्व अवधि की थीं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी गई थी और शिकायतें निराधार पाए जाने पर उनका निराकरण कर दिया गया।
चार वर्षीय बीएड-डीएड पाठ्यक्रम पर सरकार की तैयारी
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी प्रदेश में चार वर्षीय बीएड और डीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में सरकार की तैयारी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह सही है कि प्रदेश के कई महाविद्यालय आवश्यक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियम अलग हैं। राज्य में नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया तय करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो इस संबंध में आवश्यक सुझाव देगी।

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