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बस्तर में बदलाव के वाहक मोदी : किरण देव

(विश्व परिवार)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के जनसेवा के 25 वर्ष सेवा, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प की प्रेरक यात्रा है। लोक कल्याण की उनकी अहर्निश यात्रा अन्त्योदय को समर्पित है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित प्रत्येक नीति के केन्द्र में गरीब, किसान, महिला, युवा और विशेष रूप से जनजातीय समाज होता है।
छत्तीसगढ़ के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विशेष आत्मीय जुड़ाव रहा है। श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता नरेन्द्र मोदी ने प्रत्येक छत्तीसगढ़वासी के जीवन स्तर को गुणवत्ता प्रदान की है।
इस बदलाव की सबसे सुन्दर तस्वीर बस्तर में दिखाई देती है। बस्तर प्राकृतिक सम्पदा, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और मेहनतकश लोगों की धरती है। लम्बे समय तक नक्सल हिंसा के कारण इस क्षेत्र की संभावनाएँ पूरी तरह सामने नहीं आ पाईं। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की नीति ने परिस्थितियाँ बदली हैं। आज जिन इलाकों में शासन-प्रशासन का पहुँचना कठिन था, वहाँ सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल, अस्पताल और सरकारी योजनाएँ पहुँच रही हैं।
कनेक्टिविटी इस बदलाव का मजबूत आधार बनी है। बस्तर क्षेत्र में 3,240 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ है और 889 मोबाइल टॉवर लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में 234 बसाहटों को जोड़ने के लिए 228 सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिली है।
सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, वह लोगों को अवसरों से जोड़ती है। सड़क पहुँचती है तो बाजार पहुँचता है, एम्बुलेंस पहुँचती है, शिक्षक पहुँचते हैं और रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं। जिन रास्तों पर कभी नक्सली बारूद बिछाते थे, आज उन्हीं रास्तों पर विकास की गाड़ी चल रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी बस्तर तेजी से आगे बढ़ रहा है। नक्सल हिंसा के कारण बंद पड़े 421 स्कूलों को फिर से खोला गया है। अबूझमाड़ और जगरगुण्डा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित करने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हमारा प्रयास है कि बस्तर के बच्चों को अपने क्षेत्र में ही अच्छी शिक्षा, आवासीय सुविधा और आगे बढ़ने का बेहतर वातावरण मिले।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बस्तर के सभी 32 विकासखण्डों में कौशल विकास केन्द्र प्रारम्भ किए गए हैं। बस्तर ओलम्पिक ने गाँव और जनजातीय अंचलों की खेल प्रतिभाओं को बड़ा मंच दिया है। बस्तर पण्डुम ने यहाँ की संस्कृति, लोककला, परम्परा और जनजातीय गौरव को नई पहचान दी है। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी जी ने बस्तर पण्डुम की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव साफ दिखाई देता है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख से अधिक स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार की गई है। दूरस्थ क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हुआ है और गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाएँ समावेशी बनी हैं।
हमारे वैचारिक अधिष्ठान के प्रणेता श्रद्धेय दीनदयाल उपाध्याय जी कहते थे कि राजनीति का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास होना चाहिए। देश के प्रधान सेवक श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अन्त्योदय की विचारधारा को साकार रूप दिया है। उनके विजन पर चलते छत्तीसगढ़ सरकार ने नियद नेल्लानार योजना के जरिए बस्तर समेत छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम गाँवों तक विकास का उजाला पहुँचाया है। सुरक्षा शिविरों के 10 किलोमीटर के दायरे के 525 गाँवों में शासन के 17 विभागों की 43 हितग्राहीमूलक और सामुदायिक योजनाओं के माध्यम से लोगों को सुविधाओं से जोड़ा गया।
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी है कि सुरक्षा शिविरों को शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केन्द्रों से स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि सहायता, कौशल विकास, आजीविका और दूसरी नागरिक सेवाएँ लोगों के नजदीक पहुँच रही हैं।
छत्तीसगढ़ के विकास का अगला बड़ा आधार उसकी वन सम्पदा है। इमली, महुआ, सालबीज, चिरौंजी और अनेक वनौषधियाँ यहाँ के जनजातीय परिवारों की आजीविका से जुड़ी हैं। बस्तर और सरगुजा में कृषि एवं वन आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बस्तर की दूसरी बड़ी ताकत पर्यटन है। चित्रकोट और तीरथगढ़ के जलप्रपात, कांगेर घाटी, घने जंगल, गुफाएँ और अनूठी जनजातीय संस्कृति इसे प्रकृति और संस्कृति आधारित पर्यटन के लिए विशिष्ट बनाते हैं। इको पर्यटन और स्थानीय होमस्टे को बढ़ावा देकर पर्यटन को स्थानीय परिवारों की आय और रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। सिंचाई, बिजली और इंटरनेट सुविधाओं के विस्तार से भी बस्तर की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।
आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस बस्तर की चर्चा कभी हिंसा के कारण होती थी, आज उसकी चर्चा सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन, संस्कृति और आजीविका के लिए हो रही है। वर्ष 2026 के बस्तर पण्डुम के अवसर पर प्रधानमंत्री जी ने भी बस्तर में शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की बढ़ती भावना को रेखांकित किया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्यावधि कार्यकर्ताओं के साथ ही पूरे देश के लिए इसलिए भी प्रेरणापुंज है क्योंकि उन्होंने अपनी संकल्प शक्ति से राष्ट्र के नवनिर्माण को नई ऊँचाई प्रदान की है। बदलता बस्तर इसका जीवन्त उदाहरण है। बस्तर समेत देश के कोने-कोने में सेवा संकल्प अभियान को लेकर जिस तरह समाज के हर वर्ग में उत्साह देखने को मिल रहा है, वह प्रधानमंत्री जी के प्रति स्नेह व आत्मीयता का अनुपम उदाहरण है।

 

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