धर्म

जैन धर्म की आन-बान-शान बचाने जनगणना में बढ़-चढ़कर भाग लें : मुनि आगम सागर महाराज

राजिम (विश्व परिवार) । जैन समाज की घटती जनसंख्या को लेकर चिंतित जैन मुनि श्री आगम सागर महाराज ने समाजजनों से आगामी जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कभी नहीं, अब समय आ गया है कि हर जैन परिवार आगे आए और जनगणना फार्म भरकर अपनी सही संख्या दर्ज कराए, ताकि समाज की वास्तविक पहचान सामने आ सके।
दिगम्बर जैन पंचायत नवापारा राजिम के सहयोग से आयोजित विशेष बैठक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों और मंदिर समितियों के पदाधिकारी पहुंचे। इस अवसर पर मुनि श्री आगम सागर महाराज, मुनि श्री पुनीत सागर महाराज, एलक धैर्य सागर महाराज एवं स्वागत सागर महाराज के सान्निध्य में समाज प्रमुखों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर ऑनलाइन जनगणना फार्म भरवाने में सहयोग करेंगे।
छत्तीसगढ़ में 72 जैन मंदिरों के प्रतिनिधि पहुंचे नवापारा
बताया गया कि छत्तीसगढ़ में स्थित 72 जैन मंदिरों की समितियों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुए। जिसमें रायपुर, फाफाडीह, मालवीय रोड, टैगोर नगर, लाभांडी, शंकर नगर, महासमुंद, तिल्दा नेवरा, सिमगा, भाटापारा, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर, केसिंगा, गीदम, राजनांदगांव, दुर्ग, डोंगरगढ़, डोंगरगांव, भिलाई, नेहरू नगर सहित अनेक स्थानों से समाज के प्रमुखजन नवापारा पहुंचे।
नाम के साथ जैन शब्द लिखना जरूरी
मुनि श्री आगम सागर महाराज ने कहा कि जैन समाज के लोग अपने नाम के साथ जैन शब्द अवश्य लिखें, ताकि समाज की पहचान मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि कई लोग अपनी मूल पहचान छिपाकर स्वयं को अन्य वर्गों में दिखाते हैं, जिससे समाज की वास्तविक संख्या कम होती जा रही है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के सांगली, कोल्हापुर और अन्य क्षेत्रों में लाखों जैन समाज के लोग हैं, लेकिन कई लोग स्वयं को जैन के बजाय हिन्दू के रूप में दर्शाने लगे हैं। इसी प्रकार अन्य समाजों में भी जैन मूल के लोग अपनी पहचान भूलते जा रहे हैं।
पहचान बचाने का समय
मुनि श्री ने कहा कि यदि इस बार भी समाज जागरूक नहीं हुआ तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है
मुनि श्री ने कहा कि यदि इस बार भी समाज जागरूक नहीं हुआ तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है।
 जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही नीतियां, प्रतिनिधित्व और सामाजिक स्थिति तय होती है। इसलिए समाज को अपनी पहचान और अस्तित्व बचाने के लिए सजग होना होगा।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म की आन, बान और शान बचाना अब समाज के हाथ में है।
श्रावक और साधु समाज के दो पहिए
अपने संबोधन में मुनि श्री ने कहा कि धर्म व्यवस्था में श्रावक और साधु समाज एक रथ के दो पहिए हैं। यदि श्रावक समाज कमजोर होगा तो धर्म की गति भी प्रभावित होगी। साधु-संत तप और त्याग में लगे रहते हैं, लेकिन समाज पर संकट आएगा तो वे भी आगे आकर मार्गदर्शन देंगे।
बैठक में उपस्थित समाजजनों ने मुनि श्री के संदेश का समर्थन करते हुए जनगणना अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया

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