नई दिल्ली (विश्व परिवार)। पिछले डेढ़ महीने से नीट पेपर लीक पर जारी घमासान पर बीजेपी सांसद राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया सामने आई गई है। राघव चड्ढा ने नीट पेपर लीक पर चुप्पी तोड़ते हुए संसद में Anti Paper Leak Bill पर जोरदार भाषण दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी भूमिका अब बदल गई है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि अब सत्ता पक्ष में होने के कारण उनकी भूमिका सवाल उठाने की नहीं, बल्कि समाधान देने की है।
राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि मजबूत कानून से संभव है। उन्होंने सरकार के उठाए कदम, नए कानून के प्रावधान, छात्रों के अधिकार और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने भाषण के दौरान कहा कि जैसे कैंसर क्रोसिन से ठीक नहीं होता। वैसे ही पेपर लीक साउंडबाइट्स से ठीक नहीं होता। इसे एक असली इंस्टीट्यूशनल फिक्स की ज़रूरत थी, और आज हमने इसे दिया। इसीलिए मैं पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026 के सपोर्ट में खड़ा हुआ। क्योंकि यह पेपर लीक का भारत का पहला असली, इंस्टीट्यूशनल जवाब है। उन्होंने आगे कहा कि आपका गुस्सा जायज़ है, आपका दर्द असली है, सिस्टम के खिलाफ आपकी शिकायत सच्ची है। जब आपने अपनी चिंताएं बताईं, तो माननीय प्रधानमंत्री ने इसे सुना, सिर्फ़ एक PM के तौर पर नहीं बल्कि एक गार्जियन के तौर पर। जैसे एक परिवार का मुखिया सुनता है।
बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि यह कानून भारत का पहला व्यापक एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। लाखों छात्र वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। कई छात्र रोज 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जबकि परीक्षा केवल 1 से 3 घंटे की होती है। लेकिन अगर एक कैमरा फोन से फोटो खींचकर, व्हाट्सऐप पर एक मैसेज या टेलीग्राम पर एक PDF के जरिए रातों-रात पेपर लीक हो जाए, तो छात्रों की पूरी मेहनत, सपने और भविष्य खतरे में पड़ जाते हैं। पेपर लीक सिर्फ परीक्षा को प्रभावित नहीं करता, बल्कि छात्रों की मेहनत, आत्मविश्वास, भरोसा, सपने और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं हो सकता।
पेपर लीक को राजनीति का मुद्दा न बनाएं
बीजेपी राज्यसभा सांसद ने कहा कि पेपर लीक को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक यह देश की परीक्षा व्यवस्था की ‘पुरानी और गंभीर बीमारी’ है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि जवाबदेही और नैतिकता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि पेपर लीक किस राज्य में हुआ, उस समय किस पार्टी की सरकार थी या कौन मंत्री था। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
छात्रों का आंदोलन छात्रों का ही रहना चाहिए
राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, सवाल पूछने, अदालत जाने और अपनी मांग रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल की रैली नहीं बनना चाहिए। राघव चड्ढा ने कहा कि छात्र अपनी आवाज किसी राजनीतिक दल को आउटसोर्स न करें क्योंकि छात्रों की लड़ाई परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की है, जबकि नेताओं की लड़ाई कई बार राजनीतिक लाभ और सोशल मीडिया प्रचार की होती है। उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन छात्रों का ही रहना चाहिए।







