बिलासपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) की राजकिशोर नगर ब्रांच से 11 फर्जी फर्मों के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक के लोन लेने के मामले में EOW-ACB ने चालान पेश किया है. करीब छह साल तक चली विवेचना के बाद एजेंसी ने तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और विश्वजीत भौमिक को आरोपी बनाया है. 30 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने बिलासपुर में विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
2019 में ही NPA हो गए थे सभी 11 खाते
बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर ने एसीबी-ईओडब्ल्यू के पास शिकायत की थी, जिसके आधार पर 28 जनवरी 2020 को अपराध दर्ज किया गया था. मामले की विवेचना पूरी कर 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बिलासपुर में चालान प्रस्तुत किया गया।
जांच में सामने आया कि 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने बैंक के नियमों की अनदेखी करते हुए 11 अपात्र फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन की सुविधाएं स्वीकृत की थीं. इन सभी ऋण खातों को वर्ष 2019 में ही एनपीए घोषित कर दिया गया था. ऋण की अदायगी नहीं होने से बैंक को 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
लोगों के दस्तावेजों से खड़ी की फर्जी फर्में
जांच एजेंसी की विवेचना में पता चला कि विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से लोगों को छोटे ऋण दिलाने और बैंकों से लोन दिलाने का काम करता था. इस दौरान वह लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, KYC दस्तावेज और संपत्ति के मूल दस्तावेज लेता था. साथ ही बैंक के प्रपत्रों और कोरे चेकों पर हस्ताक्षर भी करा लेता था.
आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसने संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्में बना दीं. कुछ फर्मों में अपने कर्मचारियों को प्रोप्राइटर दर्शाया. तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए. वहीं सात फर्मों के GST रिटर्न उड़ान माइक्रो फाइनेंस के कार्यालय से दाखिल किए गए थे।
फर्मों के पते पर नहीं मिला कोई कारोबार
जांच की गई तो सामने आया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा ने लोन अप्रूव करने से पहले फर्मों के व्यवसाय और पते की गलत जानकारी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज की थी. कुछ मामलों में ऋण लेने वालों से असंबंधित व्यक्तियों की संपत्तियों को भी बिना उनकी जानकारी के बंधक के रूप में स्वीकार किया गया. बैंक के निरीक्षण के दौरान मौके पर किसी भी फर्म की व्यावसायिक इकाई नहीं मिली।
ऋण की रकम पहुंची भौमिक की फर्म तक
EOW-ACB की जांच के मुताबिक, ऋण के रूप में मिली रकम का इस्तेमाल संबंधित फर्मों के कारोबार में नहीं किया गया. राशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर निकाला गया. जांच में विश्वजीत भौमिक को इसका अंतिम लाभार्थी पाया गया. बैंक से मिली ऋण राशि राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के माध्यम से भौमिक की अपनी फर्म ए.बी. फास्टनर्स तक पहुंचाई गई. इसके अलावा कूटरचित बिलों के आधार पर NSIC, रायपुर से भी भुगतान प्राप्त किया गया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ इन धाराओं में चालान
EOW-ACB ने विश्वजीत भौमिक और तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 12 और 13(2) के तहत चालान पेश किया है. राहुल कुमार सिन्हा वर्तमान में बैंक ऑफ बड़ौदा की गढ़सीसा शाखा, जिला कच्छ (गुजरात) में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं।







