राजनांदगांव (विश्व परिवार)। नगर निगम के नियमित कर्मचारी प्रहलाद ठाकुर को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने अपने बच्चों की शादी के लिए लोन लेने हेतु State Bank of India की कृषि शाखा में आवेदन किया। बैंक प्रबंधन ने यह कहते हुए लोन देने से इनकार कर दिया कि नगर निगम कर्मचारियों का वेतन ट्रेजरी विभाग के माध्यम से नहीं आता, इसलिए उन्हें ऋण नहीं दिया जा सकता।
प्रहलाद ठाकुर, जो कि नगर निगम के नियमित वेतनभोगी कर्मचारी हैं, का कहना है कि उनका वेतन प्रतिमाह नियमित रूप से बैंक खाते में जमा होता है और उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद केवल ट्रेजरी से वेतन भुगतान नहीं होने का हवाला देकर लोन अस्वीकृत करना उचित नहीं है।
नियम क्या कहते हैं?
बैंकिंग नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को लोन देने का मुख्य आधार उसकी आय (आय की स्थिरता), पुनर्भुगतान क्षमता (कर्ज चुकाने की क्षमता), और साख (क्रेडिट इतिहास) होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं है कि केवल ट्रेजरी से वेतन पाने वाले कर्मचारियों को ही ऋण दिया जाए।
ऐसे में यदि नगर निगम कर्मचारी नियमित वेतनभोगी हैं और उनका वेतन बैंक खाते में आ रहा है, तो वे भी व्यक्तिगत ऋण या विवाह हेतु ऋण के पात्र हो सकते हैं।
उठ रहे सवाल:
इस मामले के सामने आने के बाद बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या बैंक द्वारा बनाए गए आंतरिक नियम RBI के दिशा-निर्देशों से ऊपर हैं? या फिर यह मामला शाखा स्तर पर मनमानी का है?
आगे क्या?
पीड़ित कर्मचारी ने इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाने की बात कही है। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कर्मचारी संगठनों में भी इस निर्णय को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि बैंक प्रबंधन इस मामले में क्या सफाई देता है और क्या नगर निगम कर्मचारियों को भी समान रूप से ऋण सुविधा मिल पाएगी या नहीं।





