(विश्व परिवार)। क्लिनिक में मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं, जिन्होंने तीस साल तक अपनी रीढ़ का ध्यान नहीं रखा और अब दस मिनट तक सिर्फ पीठ दर्द की शिकायत करते रहते हैं। सच यह है कि रीढ़ अचानक खराब नहीं होती। यह रोजमर्रा की छोटी-छोटी हरकतों के हजारों बार दोहराए जाने का नतीजा होती है। अच्छी बात यह है कि इन आदतों को बदला जा सकता है।
रीढ़ चलने-फिरने के लिए बनी है
रीढ़ में 24 गतिशील कशेरुकाएं (वर्टिब्रा) होती हैं। ये डिस्क से जुड़ी होती हैं और मांसपेशियां इन्हें सहारा देती हैं। रीढ़ को हरकतों का बोझ उठाने के लिए ही बनाया गया है। डिस्क में खून की नलियां नहीं होतीं, इसलिए उन्हें पोषण तभी मिलता है, जब शरीर हरकत में रहता है।
इसीलिए रोजाना आठ घंटे पैदल चलने वाले व्यक्ति को रीढ़ से जुड़ी परेशानी, नौ घंटे बिना हिले बैठे रहने वाले दफ्तर के कर्मचारी की तुलना में कम हो सकती है। दफ्तर में काम करने वालों को रीढ़ पर पड़ने वाले भारी बोझ से ज्यादा नुकसान एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठे रहने से होता है।
बिल्कुल सही मुद्रा जैसी कोई चीज नहीं होती
कोई एक आदर्श मुद्रा नहीं होती। सही तरीके से बैठने पर भी दो घंटे बाद पीठ में दर्द होने लग सकता है। इसलिए हर 30 से 45 मिनट में अपनी स्थिति बदलें। खड़े हों, थोड़ा चलें और पानी पिएं।
बैठते समय कंप्यूटर की स्क्रीन या किताब को आंखों की सीध में रखें। फोन को नीचे झुककर देखने के बजाय आंखों की सीध में उठाकर देखें। सिर का वजन लगभग चार से पांच किलो होता है। इसलिए गर्दन झुकाने पर नीचे की कशेरुकाओं पर बोझ बढ़ जाता है। तनाव कम करने के लिए कंधों को पीछे की ओर घुमाएं और कुछ देर दूर देखें।
कोर की मांसपेशियों को मजबूत करें
पेट, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को एक पट्टे (कॉर्सेट) की तरह समझिए। ये मांसपेशियां कमजोर हों, तो पूरा बोझ रीढ़ पर आ जाता है। कोर को मजबूत करने के लिए सरल व्यायाम करें।
चारों हाथ-पैरों के बल यानी घुटनों और हथेलियों पर आकर धड़ को बाएं और दाएं घुमाएं तथा पीठ को सीधा रखें। शुरुआत करने वालों के लिए प्लैंक, ब्रिज और स्क्वैट अच्छे व्यायाम हैं। इन्हें सप्ताह में तीन बार करने का प्रयास करें। अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम की अवधि और दोहराव तय करें।
भारी सामान सही तरीके से उठाएं
बहुत सी चोटें गलत तरीके से वजन उठाने से होती हैं। चाहे बाजार से लाया हुआ सामान हो या एयरपोर्ट पर रखा सूटकेस, मुख्य बात यह है कि पीठ पर बेवजह जोर न पड़े।
सामान उठाते समय घुटनों को मोड़कर नीचे झुकें, वस्तु को शरीर के पास से पकड़ें और पैरों की मदद से ऊपर उठें। उठाते समय पीठ को अचानक मोड़ने या झटका देने से बचें। वजन जितना कम होगा, रीढ़ पर उतना ही कम जोर पड़ेगा।
नींद, खान-पान और धूम्रपान पर दें ध्यान
नींद की आदतों में सुधार करना जरूरी है, क्योंकि अनुपयुक्त बिस्तर पर लंबे समय तक सोने से पीठ दर्द बढ़ सकता है। करवट लेकर सोते समय दोनों घुटनों के बीच तकिया रखना आरामदायक हो सकता है। पीठ के बल सोते समय घुटनों के नीचे गोल तकिया या बोलस्टर रखने से भी रीढ़ पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
अधिक वजन से पीठ दर्द बढ़ सकता है, खासकर जब पेट और धड़ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए संतुलित खान-पान और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए वजन नियंत्रित रखना फायदेमंद है।
इसके अलावा धूम्रपान से बचें। निकोटीन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है, जिससे रीढ़ के ऊतकों तक पोषक तत्वों से भरपूर रक्त पहुंचने पर असर पड़ता है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
पीठ दर्द के कई मामले समय, सामान्य गतिविधियों और उचित व्यायाम से एक-दो सप्ताह में बेहतर हो सकते हैं। लेकिन यदि दर्द किसी चोट या हादसे के कारण हुआ है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ सप्ताह बाद भी तकलीफ बनी रहे, तो डॉक्टर से मिलें।
यदि कमर से पैर तक दर्द फैल रहा हो या सुन्नपन अथवा कमजोरी महसूस हो रही हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। चोट या झटके के बाद तेज पीठ दर्द होने पर भी जांच जरूरी है।
यदि पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी, जांघों के बीच या जननांगों के आसपास सुन्नपन, पेशाब करने में परेशानी या मल-मूत्र पर नियंत्रण खोने जैसे लक्षण हों, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। सीने में दर्द, बेहोशी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
जीवनभर का निवेश
आपकी रीढ़ जिंदगी भर आपका साथ देती आई है और सही देखभाल मिलने पर आगे भी देती रहेगी। इसे सुरक्षित रखने वाली बातें मुश्किल नहीं हैं—ठीक से बैठें, खूब चलें-फिरें, मांसपेशियों को मजबूत करें, सावधानी से वजन उठाएं और जब शरीर कोई संकेत दे, तो उसे अनसुना न करें।
इन आदतों को अपनाने में ज्यादा समय नहीं लगता, लेकिन मिलकर ये लंबे समय तक आराम, चलने-फिरने की आजादी और आत्मनिर्भरता बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
इसलिए दर्द के याद दिलाने का इंतजार न करें। आज से शुरुआत करें, नियमित रहें और कोई शंका होने पर समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें। आपकी रीढ़ की सेहत के लिए आज की छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ा लाभ दे सकती हैं।







