कवर्धा (विश्व परिवार)। भारतीय किसान संघ आज अपनी मांगों को लेकर पूरे प्रदेशभर में आंदोलन कर रहा है। लगभग सभी जिलों में किसान जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कवर्धा में किसान संघ के कार्यकर्ताओं और किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। जिले में बंद बुलाकर जगह-जगह पर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया।
कवर्धा के किसान रैली के बाद टेंट लगाकर कीर्तन करते नजर आए। इस दौरान सड़क पर जाम होने से आम पब्लिश को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई राहगीर अस्पताल जा रहे थे, लेकिन प्रदर्शन के चलते फंस गए थे। मरीज को लेने जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई थी, लेकिन उन्हें रास्ता दिया गया।
किसानों की मांगों में 1700 करोड़ बकाया भुगतान, धान खरीदी, बकाया भुगतान, समर्थन मूल्य, सिंचाई, बिजली, गन्ने के दाम, गायों के लिए गौवंदन योजना और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बलरामपुर में पैदल चले किसान
बलरामपुर में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। हिंदू चौक से शुरू हुई रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। किसानों ने बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन का पुराना सर्वे लागू करने, बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक और खाद की अधिक कीमत पर बिक्री रोकने समेत सभी मांगें रखीं।
सड़क से लेकर शासन तक आंदोलन करेंगे
भारतीय किसान संघ ने कहा कि, छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन आज उसी धान उत्पादक किसान को अपनी उपज बेचने, खाद प्राप्त करने, उचित मूल्य पाने और प्राकृतिक आपदा में राहत लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सरकार यदि किसानों की समस्याओं को केवल कागजों और बैठकों तक सीमित रखती है तो भारतीय किसान संघ सड़क से लेकर शासन तक निर्णायक संघर्ष करने के लिए बाध्य होगा।
40 किलो 700 ग्राम की कटौती बंद हो
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी में किसानों के साथ होने वाली कटौती पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि, धान खरीदी में प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम ही लिया जाए। किसानों की उपज में मनमाने तरीके से अतिरिक्त वजन लेना बंद किया जाए।
संघ ने यह भी कहा कि, टोकन व्यवस्था में बड़े किसानों के लिए 5 टोकन, छोटे, सीमांत किसानों के लिए 3 और 1 टोकन की व्यवस्था की जाए, ताकि कोई भी किसान अपनी पूरी उपज बेचने से वंचित न हो।
बाढ़ से तबाह किसानों का तत्काल सर्वे और मुआवजा
हाल में आई बाढ़ से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि सरकार तत्काल खेत-खेत सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दे। केवल अधिकारियों की रिपोर्ट और कागजी खानापूर्ति से किसानों का नुकसान पूरा नहीं होगा।
किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और बाजार में अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
सिंचाई परियोजनाओं को वर्षों तक लटकाना बंद करे सरकार
भारतीय किसान संघ ने अरपा-भैंसाझार सहित अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को तत्काल गति देने और लंबित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की है। संघ ने कहा कि किसानों को हर साल सूखा, अनियमित वर्षा और सिंचाई संकट का सामना करना पड़ता है, जबकि करोड़ों रुपये की सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से फाइलों में पड़ी हैं।
गन्ना, मक्का और गेहूं उत्पादकों को भी मिले न्याय
संघ ने गन्ने के मूल्य में ₹150 प्रति क्विंटल वृद्धि कर उसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने, रबी सीजन में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मक्का और गेहूं की भी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की है।
भूमि अधिग्रहण में किसानों के अधिकारों से समझौता नहीं
भारतीय किसान संघ ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में भारतीय कृषि इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुरूप किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। संघ ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन लेना आसान समझने वाली व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
15 नवंबर से 15 फरवरी तक धान खरीदी
संघ ने किसानों ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक तय करने की मांग है। खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और टोकन प्रणाली में सुधार की मांग की जाएगी।
सरकार चेतावनी को गंभीरता से ले
भारतीय किसान संघ ने कहा कि, किसान सरकार का वोट बैंक नहीं, प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान की मेहनत का पैसा रोककर, उसकी उपज का उचित मूल्य न देकर और उसकी समस्याओं को टालकर सरकार प्रदेश का विकास नहीं कर सकती।
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि, 12 सूत्रीय मांगों पर तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए और हर मांग पर समयबद्ध कार्ययोजना घोषित की जाए।








