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स्वीडिश प्रतिनिधिमंडल और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रतिनिधियों ने सीआईआई (CII) की कार्यशाला में साझा कीं अहम जानकारियां

रायपुर (विश्व परिवार)। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने सोमवार, 18 मई 2026 को होटल हयात, रायपुर में “कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM), भविष्य के पावर टैरिफ की हेजिंग और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन” विषय पर एक विस्तृत कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय औद्योगिक क्षेत्र को वैश्विक स्थिरता (Sustainability) नियमों को समझने और हरित संचालन की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक रणनीतिक ज्ञान से लैस करना था।

उद्घाटन सत्र का नेतृत्व सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के अध्यक्ष बजरंग गोयल और सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के उपाध्यक्ष आनंद सिंघानिया ने किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए उद्योगों द्वारा कार्बन नियमों के अनुकूल होने और टिकाऊ ढांचे को सक्रिय रूप से अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वीडिश पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के प्रतिनिधिमंडल द्वारा साझा किए गए रणनीतिक विचार रहे। प्रतिनिधियों ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) की बारीकियों पर विस्तृत जानकारी दी, जिससे स्थानीय उद्योग को यूरोपीय बाजारों में अनुपालन, कार्बन अकाउंटिंग और निर्यात को सुरक्षित करने के लिए एक स्पष्ट दिशा मिली।

महत्वपूर्ण वित्तीय दृष्टिकोण को सामने रखते हुए, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) के वरिष्ठ प्रबंधक शुभम शेखर पति ने औद्योगिक ऊर्जा लागतों के कुशल प्रबंधन के लिए भविष्य के पावर टैरिफ की हेजिंग के लिए प्रभावी रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यशाला में हरित परिवर्तन के प्रमुख पहलुओं को संबोधित करने वाले अन्य प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। जेएमके रिसर्च एंड एनालिटिक्स के वरिष्ठ परामर्शदाता प्रभाकर ने सेकेंडरी स्टील क्लस्टर के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (RE) खरीद के व्यावसायिक दृष्टिकोण पर बात की। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया में स्टील विशेषज्ञ सुश्री मानसी चौहान ने भारत में ‘ग्रीन स्टील’ को सक्षम करने में कार्बन मूल्य निर्धारण की भूमिका पर चर्चा की। इसके अतिरिक्त, सीआईआई-जीबीसी के वरिष्ठ परामर्शदाता धर्मेंद्र दावड़ा ने उद्योगों के लिए जीवन चक्र मूल्यांकन (LCA) और नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लाभों पर प्रकाश डाला।

इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रमुख हितधारकों की भारी भागीदारी देखी गई, जो औद्योगिक क्षेत्र को टिकाऊ, लचीले और डीकार्बोनाइज्ड भविष्य की ओर ले जाने की सीआईआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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