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छत्तीसगढ़ के तालाबों एवं नदी घाटों का नाम बदलकर ‘छठ घाट’ किए जाने के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने सौंपा ज्ञापन

  • क्रान्ति सेना की आगामी छठ पर्व से पहले पुरखों द्वारा निर्मित तालाबों के मौलिक पहचान एवं ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ पर रोक लगाने की मांग

रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक तालाबों एवं नदी घाटों के मूल नामों को बदलकर अन्य नाम किए जाने के प्रयासों के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने आज रायपुर जिले के विभिन्न थानों, जिलाधीश, पुलिस कमिश्नर एवं नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर ऐसे नामकरण पर रोक लगाने की मांग की है।

छत्तीसगढ़िया युवा क्रान्ति सेना के अध्यक्ष टिकेश्वर निषाद ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न तालाबों एवं नदी घाटों की अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक पहचान है। इन जलस्रोतों के नाम यहां की लोकसंस्कृति, स्थानीय परंपराओं एवं पूर्वजों की विरासत से जुड़े हुए हैं। ऐसे में प्रदेश के विभिन्न तालाबों एवं नदी घाटों के मूल नामों को बदलकर अन्य नाम किए जाने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाये।

संगठन की पदाधिकारी उषा श्रीवास ने कहा कि छठ पर्व बिहार राज्य का पर्व है लेकिन पर्व के आयोजन अथवा धार्मिक आस्था के नाम पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तालाबों एवं नदी घाटों की मौलिक पहचान और ऐतिहासिक नामों को बदलना उचित नहीं है।

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का कहना है कि प्रवासियों द्वारा छठ पर्व मनाने के लिए प्रदेश के विभिन्न जलस्रोतों एवं घाटों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उनके मूल नामों को बदलकर ‘छठ घाट’ नामकरण करना छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के तालाब एवं नदी घाट केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनकी मौलिकता एवं पारंपरिक नामों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत एवं ऐतिहासिक पहचान से परिचित रह सकें।छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने प्रशासन से मांग की है कि प्रदेश के विभिन्न तालाबों एवं नदी घाटों के मूल नामों को बदलने पर रोक लगाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा छत्तीसगढ़ की मौलिक सांस्कृतिक पहचान से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न होने दी जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि तालाबों एवं नदी घाटों के मूल नामों को बदलने का प्रयास जारी रहता है, तो छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता एवं मौलिक पहचान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

 

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