रायपुर (विश्व परिवार)। बुधवार को महिला चैम्बर द्वारा “वात्सल्य से उदित- उदया” थीम के अंतर्गत एक गरिमामय और प्रेरणादायक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। महिला चैम्बर द्वारा आयोजित “वात्सल्य से उदित- उदया” कार्यक्रम में आज नारी शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी और विशिष्ट अतिथि के रूप में चैम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी उपस्थित रहे । इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “डिजिटल पे पहचान, बिज़नेस की उड़ान” के मंत्र को साकार करना था, जिसमें बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों ने हिस्सा लिया तथा नवीन जानकारियां प्राप्त कर लाभान्वित हुए।
लोकसभा सांसद माननीया रूप कुमारी चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता अब केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है, जिससे छोटे व्यवसायों को वैश्विक पहचान मिल सकती है। उन्होंने सम्मानित होने वाली 10 जांबाज महिलाओं के संघर्ष को प्रेरणादायक बताते हुए महिला चैम्बर के इस प्रयास की सराहना की।
महिला चेम्बर अध्यक्ष डॉ. इला गुप्ता ने कहा कि ‘उदया’ के माध्यम से हम महिलाओं को न केवल डिजिटल साक्षर बनाना चाहते हैं, बल्कि उन्हें एक ऐसा मंच देना चाहते हैं जहाँ उनके हुनर को सही पहचान मिल सके। डॉ. इला गुप्ता ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और श्री सतीश थौरानी जी के निरंतर सहयोग के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।
इस कार्यक्रम में हमारी एक प्यारी बिटिया रीति द्वारा शानदार कत्थक परफॉर्मेंस दी गई जिससे उसने पूरे हॉल का मन मोह लिया और कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए डॉ. इला गुप्ता ने उस नन्ही कलाकार के उज्जवल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध उद्यमी और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ निमिषा सिंह, संस्थापक– LIME-Let’s Get Social उपस्थित रहीं। उन्होंने तकनीकी सत्र में महिलाओं को संबोधित करते हुए “डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा” के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। श्रीमती सिंह ने महिला उद्यमियों को बताया कि कैसे वे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का सही उपयोग कर अपने छोटे व्यवसाय को एक बड़े ब्रांड में बदल सकती हैं। उन्होंने डिजिटल पेमेंट के सुरक्षित तरीकों और साइबर क्राइम से बचाव हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। उनकी प्रेरक बातों और व्यावसायिक अनुभवों ने उपस्थित महिलाओं में नया आत्मविश्वास भरा।
इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना अनिवार्य है और डिजिटल माध्यम इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने सम्मानित होने वाली महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में उनका संघर्ष समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का पुंज है।
महिला चेम्बर को बधाई देते हुए थौरानी ने कहा कि, महिला चेम्बर न केवल व्यापार बल्कि समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त कर रही हैं। आज का यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी प्रयासों का सम्मान है जो हम सब मिलकर एक मजबूत औद्योगिक और व्यापारिक वातावरण बनाने के लिए कर रहे हैं। जिस तरह एक माँ धैर्य और समर्पण से परिवार का सृजन करती है, ठीक उसी प्रकार आप सभी उद्यमी महिलाएं अपने व्यापार और टीम का सृजन कर रही हैं। एक सफल व्यापारी होने के साथ-साथ महिलाएं समाज की मार्गदर्शक भी हैं।
कार्यक्रम में उन 10 जांबाज महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने जीवन की अत्यंत कठिन और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी हिम्मत और सतत परिश्रम से सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। महिला चेम्बर ने इन नारी शक्तियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनकी अदम्य जिजीविषा का अभिनंदन किया। इसके साथ ही, मातृत्व की भावना को समर्पित एक विशेष सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें समाज निर्माण में माताओं के योगदान को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में सम्मानित हुए महिलाओं का संघर्ष ही स्वयं में एक प्रेरणा स्त्रोत है जो निम्नानुसार है:-
1. देविंदर कौर गुरुदत्ता:- प्रॉपर्टी विवाद में पति को खोने के बाद देविंदर जी ने 11 साल तक एक खंडहर में बिना सुविधाओं के बिताए। बच्चों के भविष्य के लिए उन्होंने एक छोटी सी दुकान (STD/PCO) से शुरुआत की और कानूनी लड़ाई लड़ते हुए अपने बच्चों को सफल बनाया। आज उनका संघर्ष और जीत समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है।
2. मधु अरोड़ा:- दिल्ली से रायपुर आकर बसी मधु जी ने तकनीक को अपना हथियार बनाया और ‘सरस्वती पाइप्स’ के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वे वर्तमान में CAIT (Confederation of All India Traders) की अध्यक्ष और नेशनल को-ऑर्डिनेटर हैं। व्यापारिक जगत में उनका नेतृत्व नारी शक्ति की मजबूती को दर्शाता है।
3. सीमा पांडेय:-एक शासकीय शिक्षिका के रूप में सीमा जी ने न केवल अपने पेशे को बखूबी निभाया, बल्कि 15 वर्षों तक पति के गंभीर स्वास्थ्य संकट के दौरान परिवार की ढाल बनी रहीं। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को इस तरह संस्कारित किया कि वे आज स्वयं की एकेडमी और फिटनेस सेंटर का सफल संचालन कर रही हैं।
4. सरोजनी पाणिग्रही:-वर्ष 2007 में सड़क हादसे में पति के निधन के बाद, सरोजनी जी ने निडर होकर पुरुषों के वर्चस्व वाले मैकेनिकल इंजीनियरिंग और फेब्रिकेशन के क्षेत्र में कदम रखा। बिना तकनीकी ज्ञान के शुरुआत कर उन्होंने ‘सरोज इंडस्ट्रीज’ खड़ी की और आज दो इंडस्ट्रियल यूनिट्स की सफल संचालिका हैं।
5. सोमा घोष:-मात्र 29 साल की उम्र में पति को खोने वाली सोमा जी ने एक गृहणी से एक सफल ‘फाइनेंशियल प्लानर’ बनने तक का कठिन सफर तय किया। चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कार चलाना सीखा और LIC सेक्टर में अपनी साख जमाई। आज वे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों (USA, ऑस्ट्रेलिया) में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
6. सोनिया साहू:-सोनिया जी व्यापारिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में सक्रिय नेतृत्व कर रही हैं। वे छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी महत्वपूर्ण पदों पर हैं। उनकी प्राथमिकता अपनी बेटियों को उच्च शिक्षित बनाना रही है, जिनमें से एक आज प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में कार्यरत है।
7. दुर्गेश नंदिनी वर्मा:- विवाह के मात्र चार साल बाद पति के देहांत ने दुर्गेश जी के जीवन में गहरा संकट पैदा किया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वन विभाग में लिपिक के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और बेटे को भी उच्च शिक्षा दिलाई। उनका बेटा आज स्वास्थ्य क्षेत्र में एक सफल ऑपरेशन्स हेड के रूप में कार्यरत है।
8. जया (बुज्जी नानी टॉयज):-जया जी की माँ ने अपने क्रॉशे (Crochet) के हुनर को ‘बुज्जी नानी टॉयज’ के रूप में एक सफल व्यवसाय में बदलकर 70 अन्य महिलाओं को रोजगार दिया। उनके अटूट सहयोग के कारण ही उनकी बेटियाँ और बेटा आज विभिन्न क्षेत्रों (UPSC, IT और बिजनेस) में सफलता के शिखर की ओर बढ़ रहे हैं।
9. इंदिरा जैन (राजेश पब्लिसिटी):-पति के आकस्मिक निधन के बाद इंदिरा जी ने पुरुष प्रधान विज्ञापन जगत में ‘राजेश पब्लिसिटी’ की कमान संभाली और प्रदेश की “प्रथम महिला एडवर्टाइज़र” बनीं। उन्होंने व्यापार के साथ-साथ सामाजिक सेवा (दिव्यांग कल्याण) और परिवार में ऐसा संतुलन बनाया कि आज उनके बच्चे सुप्रीम कोर्ट और बिजनेस में प्रतिष्ठित हैं।
10. इंद्रा करन राजपूत:-किसान परिवार में जन्मी इंद्रा जी की शादी मात्र 9वीं कक्षा के बाद हो गई थी। पति के कैंसर से निधन के बाद बिना छत और जमापूंजी के उन्होंने ‘लाडो बुटिक’ की शुरुआत की और कभी-कभी दुकान में ही सोकर दिन-रात मेहनत की। उनके इसी संघर्ष का फल है कि आज उनके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर उनका मान बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से महिलाओं की शंकाओं का समाधान किया गया। अंत में, महिला चेम्बर द्वारा प्रदेश अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी जी का विशेष अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोज और नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ, जहाँ उपस्थित सदस्यों ने व्यावसायिक अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी, सलाहकार तिलोकचंद बरडिया, वाईस चेयरमेन चेतन तारवानी, कार्यकारी अध्यक्ष राधा किशन सुन्दरानी, राजेश वासवानी, उपाध्यक्ष लोकेश चंद्रकांत जैन दिलीप इसरानी, जीतेन्द्र शादिजा, प्रकाश लालवानी, अजय जैसिंघानी, सोनिया साहू, मंत्री पंकज छिजवानी, महिला चेम्बर अध्यक्ष- डॉ. इला गुप्ता, महामंत्री- मनीषा तारवानी, कोषाध्यक्ष- नम्रता श्रीकांत अग्रवाल, संरक्षक- मीनाक्षी टुटेजा, सलाहकार आभा मिश्रा, वित्तीय सलाहकार सोमा घोष, हेमल बेन शाह, उपाध्यक्ष सुनीला अग्रवाल, कांता धीमान, इंदिरा जैन, संपादक मीडिया प्रभारी-सुनीता पाठक, यूथ प्रभारी- सुनिधि पांडे, प्रबंधक मनीषा सिंह, जन शिक्षण संसथान से वसुंधरा पाल, गायत्री श्रीनिवास, अदिति नाग, अनामिका, भानु जैन, शालू चौरे, श्रीमती धीमान, आइटीएम युनिवर्सिटी से डॉ. गुंजन मिश्रा, मोह. फैज़ल खान, सदस्य मधु अरोरा, ज्योति दरिया, निलम वर्मा, निरूपा ज़वेरी, शिला शर्मा, जया यादव, बुज्जी नानी, रमनम्मा, मधु आठवानी, सुचित्रा श्रीनाथ, साधना चटर्जी, पूजा घोष, राधिका तिवारी, सोनिया शांडिल्य, लक्ष्मी मूर्ति, इंदिरा करण राजपूत, सुमन दुग्गड़, सलोनी दुग्गड़, संचिता, इशिका साहू, कविता मारा, मीनाक्षी टुटेजा, इंदरानी खन्ना, नंदिनी वर्मा, सुनीता अग्रवाल, निलम, दिवकृति, अन्नू अरोरा, सविता मौर्य, देवयानी पाण्डेय, सीमा पण्डे, मालती महुआ,गोपाल के अग्रवाल, डिम्पल खट्टर, रितिलाल, सुचिता बघेल, राधेश्याम बघेल, कांता बघेल, सहित बड़ी संख्या में चेम्बर पदाधिकरिगण एवं व्यपरिगण उपस्थित रहे।








