रायपुर (विश्व परिवार)। दिगंबर जैन समाज का परवाधीराज “” पर्युषण पर्व बुधवार 16 सितंबर से प्रारंभ हुए। कचना,अमलतास केवल स्तिथ 1008 श्री मुनि सुब्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर में दस दिवसीय महापर्व के प्रथम दिवस ” उत्तम क्षमा धर्म “मनाया गया. जिसके अंतर्गत श्री जी को पाण्डुक शीला पर विराजित कर अभिषेक व शांति धारा नित्य पूजन के पश्चात दस लक्षण विधान की आराधना की गई।
उत्तम क्षमा धर्म पर विशेष आध्यात्मिक जानकारी देते हुए भाई सुरेश मोदी ने बताया कि अपमान ,दुर्व्यवहार या कष्ट पहुंचाने पर भी मन में क्रोध या बदले की भावना मन में ना लाना उत्तम क्षमा धर्म है. सहनशीलता और क्षमा भाव आत्मा का मूल और आंतरिक गुण है, जबकि क्रोध बाहरी और विकृत भाव है. क्षमा करना कमजोर व्यक्ती की विवशता नहीं परन्तु बलवान और वीर मनुष्यों का आभूषण माना जाता है. क्षमा करने से हृदय में शीतलता और आंतरिक आनंद की अनुभूति होती है. जबकि प्रतिशोध की भावना मन को अशांत करती है. प्रतिकूल परिस्थितियों को सहज भाव से सहन करने पर पुराने कर्मों की निर्जरा( विनाश )का नाश होता है. उपरोक्त दस दिवसीय पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस प्रात: 7-30 बजे समाज सेविका, सुश्राविका गरिमा पालीवाल जी के द्वारा मंदिर परिसर में ध्वजा रोहन किया गया।







