रायपुर (विश्व परिवार)। रायपुर के नकटी गांव में बेघर हुए परिवारों के समर्थन में बजरंग दल ने विरोध किया। 6 जुलाई को कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और भाजपा नेताओं के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस प्रदर्शन के बाद VHP संगठन ने बजरंग दल के जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा को पद से हटा दिया है।
विजेंद्र वर्मा के मुताबिक, बुलडोजर कार्रवाई में 2 मंदिर तोड़े गए, रखरखाव की कमी से 2-3 गायों की मौत हो गई। कई बेघर परिवारों को 7 दिन बाद भी अच्छा खाना नहीं मिला। इन सभी मुद्दों को लेकर उन्होंने घेराव किया था। इसके बाद ही संगठन के प्रांत मंत्री पुरेंद्र सिन्हा ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए व्हाट्सऐप पर नोटिस भेजा।
वहीं, संगठन की इस कार्रवाई के बाद समर्थन में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने भी संगठन छोड़ दिया है और अलग संगठन बनाने की बात कही है।
नकटी कार्रवाई के विरोध के बाद एक्शन
पूर्व रायपुर संयोजक विजेंद्र वर्मा ने कहा कि, जिला प्रशासन ने नकटी गांव में करीब 80 घरों को तोड़ दिया। जिन लोगों को जिस जगह विस्थापित किया गया, वहां खाने-पीने की सुविधा नहीं थी। वे जहां पर काम करते थे उससे करीब 20-30 किलोमीटर दूर बसा दिए गए। उनके पास कोई काम भी नहीं था। बेघर लोगों को जो फ्लैट दिए गए इतने छोटे हैं कि उनमें एक पूरे परिवार का रहना संभव नहीं था।
विस्थापितों के लिए बनाई गई जगह पर पानी और बिजली की सुविधा नहीं थी। नकटी गांव में कई गोवंश भी थे, जिन्हें हमने गौशाला में शिफ्ट कराया। इनमें से कई गायों की मौत भी हो चुकी थी। वहां पर शीतला माता और शंकर भगवान के मंदिर थे उन्हें तोड़ दिया गया, लेकिन उसका विस्थापन नहीं किया गया। इन सब परेशानियों को लेकर हमने बेघर परिवारों के समर्थन में 6-7 दिन बाद कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया था।
सरकार से पूछा था सवाल
विजेंद्र वर्मा का कहना है कि, उन्होंने इस विस्थापन को लेकर सरकार से सवाल पूछे थे। इन सवालों से सरकार की छवि धूमिल हुई। फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वह अपनी छवि को बचाने में लगी है। हिंदू समाज और हिंदू आस्था का विषय था इसलिए हमने कलेक्ट्रेट का घेराव किया था। हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर हमने पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था और आगे भी करेंगे।







