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आपका सवाल , जिम्मेदारों का जवाब: विकास शर्मा

(विश्व परिवार)। इन दिनों बिजली उपभोक्ता अधिक बिजली बिल की शिकायतें कर रहे हैं। उपभोक्ता इसके पीछे स्मार्ट मीटर की रीडिंग में दोष देख रहे हैं। बढ़ते बिजली बिल और सोशल मीडिया में विभिन्न दावों के बीच एक उपभोक्ता के कुछ स्वाभाविक सवाल हैं। आइए जिम्मेदारों से जानते हैं इन सवालों के जवाब बिजली उपभोक्ता कह रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगने से बिल अपने आप अधिक आने लगता है । क्या यह सही है ?

स्मार्ट मीटर लगने से बिल बढ़ता है तथ्यों पर आधारित नहीं है , पर सच्चाई यह है कि बिल के बढ़ने के कई कारण हैं। यदि बिल बढ़ा है तो वास्तविक खपत के साथ ही कभी – कभी वायरिंग में फाल्ट, लीकेज करंट और खराब उपकरण भी कारण हो सकते हैं और इनसे भी कुछ खपत में फर्क आ सकता है।

क्या स्मार्ट मीटर पुराने इलेक्ट्रानिक मीटर से तेज चलता है ?

देखिए, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्ड (BIS) मानकों तथा केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की तकनीकी मापदण्ड के अनुरूप स्मार्ट मीटर के परीक्षण उपरांत उपभोक्ताओं के यहाँ स्थापित किए जाते हैं संदेह होने पर मीटर परीक्षण का अनुरोध भी किया जा सकता है।

क्या बिजली बंद होने पर भी यूनिट बढ़ती है और क्या नेटवर्क न होने पर रीडिंग गलत होती है ?

सामान्य परिस्थितियों में तो बिल्कुल भी नहीं। इस प्रकार के प्रमाण सामने नहीं आए हैं। अधिकांश स्मार्ट मीटर खपत का डेटा सुरक्षित रखते हैं और नेटवर्क मिलने पर भेजते हैं।

क्या स्टैंडबाय उपकरण भी बिजली लेते हैं?

हाँ, टीवी, राउटर, चार्जर आदि थोड़ी ऊर्जा लेते हैं। इस बात को एक उपभोक्ता को भी समझनी चाहिए कि किसी भी उपकरण का उपयोग यदि नहीं है तो उसे पूर्ण रूप से स्वीच के स्तर पर बंद करें। इससे उस उपकरण के अंदरूनी कलपुर्जों को चलाने के लिए ऊर्जा खपत न हो। स्मार्ट मीटर ऐसे सभी खपत को दर्ज करता है। इसे इस उदाहरण के साथ समझे कि यदि आप मोबाइल में बहुत सारे एप्लिकेशन को खोलकर बिना बंद किए मोबाइल को रखते हैं तो बैट्री जल्द डिस्चार्ज होती है। यानी उस दौरान मोबाइल इन एप्लिकेशनों को आंतरिक रूप से एक्टिव रखने के लिए ऊर्जा खपत करता है।

सोशल मीडिया पर बहुत से लोग स्मार्ट मीटर की रीडिंग को त्रुटिपूर्ण बताते हैं । क्या खराब अर्थिंग और न्यूट्रल से स्मार्ट मीटर अधिक यूनिट दर्ज करता है ?

खराब अर्थिंग से ही नहीं, खराब अर्थिंग और गलत वायरिंग के कारण वास्तविक लीकेज करंट बह रहा है, तो उस ऊर्जा को मीटर दर्ज करेगा। वैसे इस प्रकार के मामले अपवाद के तौर पर ही हो सकते हैं। कुल मिलाकर अर्थिंग के माध्यम से मीटर में रीडिंग दर्ज करने का तथ्य परक मामला सामने नहीं आया है। तर्क दिए जा सकते हैं पर कुछ सुधार के लिए तथ्य का होना भी जरूरी है। खराब न्यूट्रल सुरक्षा तथा उपकरणों के संचालन को प्रभावित कर सकता है।

एक आम उपभोक्ता आखिर बिजली बिल के बढ़ने के असल कारण को कैसे जान सकता है ?

प्राथमिक तौर पर तो वह अपने बिल में खपत को देखे। खपत यदि अपेक्षा से अधिक है तो स्वाभाविक है चिंता होगी। फिर भी अपने स्तर पर भी वह स्मार्ट मीटर की प्रौद्योगिकी का लाभ लेते हुए प्रारंभिक तौर पर मीटर की रीडिंग को जाँच सकता है।

उपभोक्ता मोर बिजली मोबाइल एप्लिकेशन को अपने मोबाइल पर डाउनलोड कर ले। एप में स्मार्ट मीटर के बटन पर क्लिक कर आगे बढ़े। कुछ समय के लिए अपने घर के सभी उपकरणों को बंद कर दे। चाहें तो कुछ देर के लिए या आधे घंटे के लिए। उपभोक्ता देख सकता है कि क्या इस दौरान किसी भी प्रकार की रीडिंग दर्ज की गई है।

मोर बिजली एप में आपको बहुत सी सहुलियतें दी गईं हैं। एक बार उसमें जाकर आप देखें कि आपके प्रतिदिन खपत की क्या स्थिति है, खपत के अनुसार इस माह कितना यूनिट खर्च का अनुमान है। बीते महीनों से लेकर बीते वर्ष में खपत की क्या स्थिति थी जैसी अनेक जानकारियाँ देखी जा सकती हैं।

मीटर रीडिंग सही है तो फिर अचानक पिछले एक- दो महीने में बहुत से उपभोक्ताओं का बिल एकदम बढ़ा हुआ आया है इसके पीछे और क्या कारण हो सकते हैं ?

बिल को लेकर अलग-अलग प्रकरण में अलग कारण हो सकते हैं। एक स्वाभाविक कारण गर्मी का मौसम है। अधिकांश घरों में एसी , कूलर निरंतर चले हैं। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा संकट के बाद से विगत कुछ महीनों में बहुत से घरों में इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रिक स्टोव (इंडक्शन) समेत अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों की वृद्धि हुई है। फिर भी खपत यदि पहले जैसी है और बिल अधिक आया है तो एक कारण स्वीकृत भार का बढ़ जाना है। बहुत से उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी नहीं हो पा रही है कि उनके बिल में खपत के साथ ही भार वृद्धि (लोड एन्हेन्समेंट) का शुल्क इस माह जुड़कर आया है। इसके अलावा शासन की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के प्रावधानों के तहत 400 यूनिट की सीमा को पार करने के कारण राहत से वंचित हुए हैं।

यह भार वृद्धि शुल्क (लोड एनहैंसमेंट चार्ज) क्या है और क्या यह हर माह लगता रहेगा ?

विद्युत कंपनी उपभोक्ताओं से मीटर कनेक्शन के दौरान उसकी विद्युत आवश्यकताओं का अनुमान लेकर आवेदन अनुसार विद्युत भार स्वीकृत करती है और इस हेतु वह मीटर कनेक्शन देते वक्त एक निर्धारित शुल्क लेती है। चूंकि समय के साथ विभिन्न आवश्यकताओं के कारण धीरे-धीरे हम अपने घरों में अनेक विद्युत उपकरण शामिल करते जाते हैं किंतु हम कार्यालय में भार वृद्धि हेतु आवेदन नहीं करते हैं और वही पुराना स्वीकृत भार चलता रहता है।

उपभोक्ता को अपने उपकरणों की भार क्षमता अनुसार ही भार वृद्धि कर ली जानी चाहिए पर वह जाने अनजाने नहीं हो पाता किंतु स्मार्ट मीटर उस वृद्धि को दर्ज करता है और उसकी जानकारी डाटा सेंटर में प्रेषित करता है। अब विद्युत नियामक आयोग के निर्धारित नियमों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता की अधिकतम मांग लगातार तीन माह तक बढ़ी हुई हो तो उसके बढ़े हुए भार को ही उसका स्वीकृत भार बना दिया जाए और निर्धारित शुल्क उसके बिल में जोड़कर भेजा जाए। इस प्रकार बीते दो माह में बहुत से उपभोक्ताओं को भार वृद्धि का शुल्क भी जोड़कर भेजा गया है। वर्तमान में भार वृद्धि हेतु 800 रुपए प्रति किलोवाट का शुल्क निर्धारित है।

क्या मीटर की जाँच कराई जा सकती है ? क्या शुल्क निर्धारित है ?

हाँ, बिल्कुल कराई जा सकती है। पहले तो आप घर पर ही समझे अपने खपत के पैटर्न को। इसके बावजूद यदि आप असहमत हैं टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत करें एवं चेक मीटर लगाने का आग्रह अपने नजदीकी विद्युत कार्यालय में जाकर करें। आपके घर पर जल्द ही चेक मीटर लगाया जाएगा । इस चेक मीटर से भी संतुष्ट न हों तो आगे भी जाँच की सुविधा है । एनएबीएल प्रमाणित मीटर जाँच प्रयोगशाला है। जिसे हम सेन्ट्रल टेस्टिंग लैब कहते हैं और यह भिलाई में स्थित है। इसके अलावा मीटर जाँच की सुविधा रायपुर एवं बिलासपुर में भी है। सिंगल फेज मीटर के लिए 450 रुपए और थ्री फेज के लिए 550 रुपए शुल्क निर्धारित है।
उपरोक्त के बाद उपभोक्ता के पास और भी अधिकार है। वह विद्युत उपभोक्ता शिकायत फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। यह फोरम प्रदेश के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों में स्थित है और यह एक स्वतंत्र निकाय है।

सोशल मीडिया पर अनेक शिकायतें चल रही हैं, उपभोक्ता उसका समाधान चाहता है पॉवर कंपनी कैसे देखती है इन बातों को ?

शिकायतों का सम्मान है पर वो सही मंच पर हो। मीडिया में तर्क रखें जा रहे हैं पर बहुत से मामलों में तथ्य की कमी है। व्यक्तिगत बिलिंग संबंधी शिकायत बिल्कुल हो सकती है। मीटर रात में स्वयं चलता है, मोबाइल सिग्नल से बिल बढ़ता है, SIM का शुल्क उपभोक्ता देता है ऐसे बहुत से दावे सोशल मीडिया में किए जा रहे हैं। इन दावों के समर्थन में सामान्य रूप से विश्वसनीय तकनीकी प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। मैं तो आग्रह करूंगा कि सोशल मीडिया की बजाय अधिकृत शिकायत तंत्र का उपयोग करें तथा तकनीकी परीक्षण की रिपोर्ट प्राप्त करें। त्रुटियाँ होंगी तो बिल्कुल सुधार होगा। पॉवर कंपनी समझती है कि बहुत बड़ा सिस्टम है तो कुछ त्रुटि हो सकती है। उपभोक्ताओं के सहयोग से उसे सुधारते हुए व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।

 

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