बिलासपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि स्कूल परिसर को संपत्ति की कस्टडी वाली जगह माना जाएगा और यहां बिना अनुमति घुसना भारतीय दंड संहिता (ढ्ढक्कष्ट) के तहत हाउस ट्रेसपास की श्रेणी में आ सकता है। कोर्ट ने इस आधार पर याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने अपने फैसले में ढ्ढक्कष्ट की धारा 452, 442 और 441 की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि हाउस ट्रेसपास केवल रहने या पूजा स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी इमारतें भी इसमें शामिल हैं जहां संपत्ति सुरक्षित रखी जाती है। स्कूल भवन को इसी श्रेणी में माना जा सकता है, क्योंकि वहां फर्नीचर और शैक्षणिक सामग्री रखी जाती है।
मामला कृष्णा किड्स एकेडमी से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता विकास तिवारी (एनएसयूआई सदस्य) पर आरोप है कि वह साथियों के साथ स्कूल परिसर में जबरन घुसा, गाली-गलौज की और महिला स्टाफ के साथ दुव्र्यवहार किया। इस पर स्कूल प्रशासन की शिकायत के बाद ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ ढ्ढक्कष्ट की धारा 452, 294 और 34 के तहत आरोप तय किए थे।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि वह स्कूल के कथित अवैध संचालन के विरोध में गया था और स्कूल रहने की जगह नहीं होने के कारण धारा 452 लागू नहीं होती। हालांकि, राज्य पक्ष ने कर्मचारियों के बयान के आधार पर आरोपों को सही बताया।
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करना उचित है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को कब्जे में मौजूद परिसर में बिना अनुमति प्रवेश का अधिकार नहीं है।
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविजनल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।





