- शौचालय की कमी पर हाईकोर्ट का रूख सख्त, शिक्षा सचिव को भेजा नोटिस
रायपुर (विश्व परिवार)। छग प्रदेश के 25 वर्ष होने के बाद भी सरकारी स्कूलों विशेषकर जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की समस्या लंबे समय से विद्यमान है। शौचालय की सुविधा नहीं होने से छात्राओं की स्थिति काफी गंभीर है। यह महत्वपूर्ण चिंतन का विषय है जिस पर अब तक सरकार ने कोई गंभीर कदम नहीं उठाए है। उक्त विषय पर छग हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच में सुनवाई के दौरान लगी जनहित याचिका पर सख्त रूख अपनाते हुए छग शासन के शिक्षा सचिव को नोटिस जारी किया है। जारी नोटिस में डबल बेंच ने हिंदी दैनिक में मुद्रित एक समाचार पर भी संज्ञान लिया है और उस पर शिक्षा सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है। ज्ञातव्य है कि रिपोर्ट के अनुसार छग में 5 हजार से अधिक स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। जबकि आठ हजार स्कूलों में शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय ही नहीं है ऐसी स्थिति में बालिकाओं के लिए शौच आदि से निवृत होना कठिन समस्या है। हाईकोर्ट को जनहित याचिका के माध्यम से यह भी जानकारी मिली है कि 200 से अधिक स्कूलें में शौचालय उपयोग योग्य नहीं है। राज्य भर में 56,615स्कूलों में से 54715 स्कूलों में शौचालय है। जिनमें से 52 545 ही उपयोग योग्य है। हाईकोर्ट नेे उक्त स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकारी रिपोर्ट जो जनहित याचिका में संलग्र की गई है के अध्ययन के पश्चात टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति छात्राओं की दृष्टि से स्कूलों में शौचालय न होना बेहद शर्मनाक है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।





