जयपुर (विश्व परिवार)। आचार्य रत्न बाहुबली महाराज की पट्ट शिष्या गणिनीप्रमुख आर्यिकारत्न जिनदेवी माताजी ससंघ आगरा रोड पर खानिया स्थित राणाजी की नसियां में विराजमान हैं। शुक्रवार 29 मई को नसियाँ जी में आयोजित धर्म सभा में माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में सबसे बड़ा पर्दा यदि कोई है, तो वह मोह का पर्दा है। यह पर्दा आँखों पर नहीं, बल्कि आत्मा के ज्ञान और दर्शन पर पड़ा होता है। जब तक मोह का पर्दा बना रहता है, तब तक जीव सत्य को देखकर भी नहीं देख पाता।
जैन दर्शन में मोहनीय कर्म को सभी कर्मों का राजा कहा गया है। क्रोध, मान, माया और लोभ—ये सब मोह की ही संतान हैं। मोह जीव को शरीर, धन, परिवार, पद और प्रतिष्ठा में ऐसा बाँध देता है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है।
जिस प्रकार घने बादल सूर्य को नहीं मिटा सकते, केवल ढक लेते हैं, उसी प्रकार मोह आत्मा के ज्ञान को नष्ट नहीं करता, बल्कि उसे ढक देता है। आत्मा तो अनंत ज्ञान और अनंत सुख का भंडार है, परंतु मोह का पर्दा उसे प्रकट नहीं होने देता।
एक व्यक्ति दर्पण के सामने खड़ा हो, लेकिन दर्पण पर धूल जमी हो, तो अपना चेहरा स्पष्ट नहीं देख सकता। दोष चेहरे का नहीं, धूल का है। उसी प्रकार आत्मा में कोई कमी नहीं है, कमी मोह के पर्दे की है।
जब मोह का पर्दा हटने लगता है, तब जीव को संसार की नश्वरता समझ में आती है। उसका मन वैराग्य की ओर बढ़ता है और आत्मकल्याण का मार्ग खुलने लगता है।
“मोह का पर्दा जितना मोटा होगा, आत्मा का प्रकाश उतना ही कम दिखाई देगा। और जैसे-जैसे मोह का पर्दा हटेगा, आत्मा का दिव्य स्वरूप प्रकट होता जाएगा।
जिनवाणी स्तुति के साथ समापन हुआ।
राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि प्रातः मूलनायक भगवान वासूपूज्य भगवान के अभिषेक के बाद शांतिधारा की गई। तत्पश्चात धर्म सभा के प्रारम्भ में चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन के बाद श्रद्धालुओं द्वारा पूजनीया माताजी का पाद पक्षालन किया गया। भक्तिभाव से जिनवाणी भेंट की गई।इस मौके पर बडी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।







