रायपुर (विश्व परिवार)। वन मंत्री केदार कश्यप ने वन विभाग में वर्षों से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों को आगामी तीन माह के भीतर अनिवार्य रूप से निराकृत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के बाद यदि पुराने प्रकरण असामान्य अथवा अत्यधिक विलंब से प्रस्तुत किए जाते हैं, तो संबंधित जांचकर्ता एवं प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, वन विभाग को विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।
वन मंत्री ने कहा कि विभागीय जांच मामलों में अनावश्यक देरी न केवल प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है, बल्कि इससे कर्मचारियों को वर्षों तक मानसिक, सामाजिक एवं सेवा संबंधी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में निर्णयहीनता और अनावश्यक विलंब के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
कश्यप ने कहा कि कई मामलों में विभागीय जांच प्रस्ताव 4-5 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि कुछ प्रकरण संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद भेजे जाते हैं। उन्होंने इसे सुशासन, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की भावना के विपरीत बताया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रकरण लंबित रहने से न केवल अभिलेखों और साक्ष्यों के परीक्षण में कठिनाई आती है, बल्कि विभागीय कार्यवाही की गंभीरता और प्रभावशीलता भी कमजोर होती है। कई कर्मचारी वर्षों तक बिना निर्णय की स्थिति में कार्य करने को विवश रहते हैं, जिससे उनके सेवा हित, पदोन्नति, पेंशन एवं व्यक्तिगत जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
वन मंत्री ने कहा, “न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करने के समान है। यदि कोई कर्मचारी दोषी है तो समय पर कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि निर्दोष है तो उसे अनिश्चितता एवं अनावश्यक उत्पीड़न से शीघ्र राहत मिलनी चाहिए,”
वन मंत्री केदार कश्यप ने निर्देश दिए हैं कि एक माह के भीतर विभाग में पूर्व से लंबित सभी विभागीय जांच प्रकरणों की जानकारी संकलित की जाए तथा सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना प्रशासनिक सुधार संभव नहीं है। विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना सुशासन की मूल आवश्यकता है।
वन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुशासन, समयबद्ध निर्णय और जवाबदेह कार्यसंस्कृति पर दिए जा रहे विशेष बल के अनुरूप वन विभाग में भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया जा रहा है।
कश्यप ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें कर्मचारियों को समय पर न्याय मिले, निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी हो और जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय हो।









