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ससंघ बंजारी धाम पहुंचे मुनि आगम सागर, बड़ा मंदिर में वर्षायोग के संकेत

  • रायपुर की पावन धरा पर चातुर्मास की प्रबल संभावना

रायपुर (विश्व परिवार)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की धरा पर इस वर्ष जैन धर्म की प्रभावना का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिल सकता है। चातुर्मास की मंगल बेला नजदीक आते ही सकल जैन समाज में भारी उत्साह और उत्सुकता का माहौल है। रायपुर के मालवीय रोड स्थित केंद्रीय जैन मंदिर (बड़ा मंदिर) में इस वर्ष महान संतों के सान्निध्य का सौभाग्य मिलने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं।
मुनि आगम सागर ससंघ वर्तमान में बंजारी धाम रायपुर भनपुरी में सानंद विराजमान हैं। हालांकि, संघ की ओर से अभी तक चातुर्मास को लेकर कोई आधिकारिक (अधिकृत) घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उनके अनियत विहारी की दिशा को देखते हुए यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका मंगल विहार रायपुर शहर की ओर ही होना है। महाराज के रुख, विहार की वर्तमान दिशा और भक्तों के प्रति अगाध वात्सल्य को देखते हुए जैन समाज का दृढ़ विश्वास है कि इस बार मालवीय रोड स्थित ‘आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ)’ को ही उनके पावन वर्षायोग का परम सौभाग्य प्राप्त होगा।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पंचायत ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय जैन नायक ने बताया कि मालवीय रोड स्थित इस लगभग 150 वर्ष पुराने अतिशयकारी प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे ‘लघु तीर्थ’ बनाने की अंतिम देशना (मंगल आशीर्वाद) संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महामुनिराज के रायपुर प्रवास के दौरान प्राप्त हुई थी। आचार्यश्री, जिनकी उत्कृष्ट यम समाधि डोंगरगढ़ में हुई, उनके द्वारा अपने अंतिम समय में इस नवीन जिनालय लघु तीर्थ के निर्माण का मंगल आशीर्वाद मिलना रायपुर समाज के लिए परम सौभाग्य की बात है।
ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्यश्री की भावना के अनुरूप, यहाँ ऊंचे शिखर का 3 मंजिला भव्य मंदिर, त्रिकाल चौबीसी और सहस्रकूट जिनालय बनना तय हुआ है। इसके साथ ही परिसर में संत निवास, सर्वसुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग एवं एक सुंदर गार्डन का निर्माण कार्य भी किया जाएगा।
अध्यक्ष संजय जैन नायक ने ऐतिहासिक संदर्भ साझा करते हुए बताया कि स्वयं आचार्य विद्यासागर महाराज ने इस नवीन जिनालय के लिए दिशा-निर्देश देते हुए यहाँ अखंड ज्योति प्रज्वलित करने हेतु कहा था। गुरु आज्ञा पर अमल करते हुए, दिनांक 25/01/2024 (तिथि पौष कृष्ण पूर्णिमा, वीर निर्माण संवत 2250, गुरुवार) को गुरु पुष्य नक्षत्र के परम पुण्य सुअवसर पर मूलनायक आदिनाथ भगवान की वेदी के समक्ष इस अखंड ज्योति की स्थापना की गई थी। यह अखंड ज्योत नवीन जिनालय लघु तीर्थ का कार्य प्रारंभ होकर पूर्ण होने तक अनवरत प्रज्वलित रहेगी। वर्तमान में समाज जनों के दर्शन के लिए यह अखंड ज्योति मूलनायक भगवान की वेदी के बाहर उपलब्ध है।

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