रीवा में प्रातः 6 बजे कलेक्ट्रेट के सामने एक अत्यंत दुखद सड़क दुर्घटना में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्याएँ आर्यिका श्री 105 उपशममति माताजी तथा आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माताजी को एक तेज रफ्तार ऑल्टो कार ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनों आर्यिकाओं की समाधि हो गई। घटना के बाद सम्पूर्ण जैन समाज में गहरा शोक एवं रोष व्याप्त है।
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि आर्यिका संघ का चातुर्मास जैन शाश्वत तीर्थ क्षेत्र संवेद शिखरजी झारखंड में सम्पन्न हुआ था। तत्पश्चात पंचतीर्थ यात्रा करते हुए संघ सतना एवं अमरपाटन से विहार कर लगभग 15 दिन पूर्व रीवा पहुँचा था। बुधवार प्रातः आर्यिका संघ जैन मंदिर से दर्शन उपरांत विहार कर रहा था, तभी प्रयागराज से नागपुर जा रही एक ऑल्टो कार के चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए दोनों आर्यिकाओं को टक्कर मार दी।
दुर्घटना में आर्यिका श्रुतमति माताजी की समाधि प्रातः लगभग 6:15 बजे हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल आर्यिका उपशममति माताजी ने संत निवास, रीवा में सायं लगभग 4 बजे णमोकार मंत्र श्रवण करते हुए शांतिपूर्वक देह त्याग दी।
घटना की सूचना मिलते ही रीवा सहित सागर, दमोह, छतरपुर, सतना, जबलपुर, कटनी, पन्ना, सीधी, सिंगरौली, इलाहाबाद एवं अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन रीवा पहुँचे। रीवा कलेक्टर श्री नरेंद्र सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक श्री गुरुशरण सिंह ने भी संत निवास पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बताया गया है कि दुर्घटना में शामिल ऑल्टो कार को जबलपुर जिले के बरगी थाना क्षेत्र में रोका गया तथा चालक रसीद खान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वाहन में उसके परिवार के सदस्य भी यात्रा कर रहे थे।
आर्यिका श्री 105 उपशममति माताजी – संक्षिप्त परिचय
आर्यिका उपशममति माताजी का गृहस्थ नाम वाणी जैन था। आपका जन्म 26 मई 1979 को तमिलनाडु के चैय्यर नगर में श्रीमती लक्ष्मी एवं श्री देवकुमार जैन के यहाँ हुआ था। आपने बी.कॉम प्रथम वर्ष तक शिक्षा प्राप्त की। आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होकर वर्ष 1999 में तमिलनाडु के पुन्नूर मलाई में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया।
13 फरवरी 2006 को सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर (दमोह) में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के करकमलों से आर्यिका दीक्षा ली
आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माताजी – संक्षिप्त परिचय
आर्यिका श्रुतमति माताजी का गृहस्थ अवस्था का नाम जूली जैन था। आपका जन्म 15 जुलाई 1978 को सागर नगर में हुआ था। आपने एम.एससी. (मानव शास्त्र) एवं एम.ए. (संस्कृत) की शिक्षा प्राप्त की थी।
29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ, सागर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया तथा 13 फरवरी 2006 को सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आर्यिका दीक्षा प्राप्त की।
वे वर्तमान में आर्यिका सौम्यमति माताजी के संघ में विराजमान थीं। उनके बड़े भाई वर्तमान में आचार्य संघ के उपसंघ तारादेही जिला दमोह में विराजमान मुनि श्री प्रबोध सागर महाराज के संघस्थ मुनि श्री अचलसागर महाराज हैं। इनके पिता ज्ञानचंद जैन, मां अंगूरी बाई, बड़ी बहन अल्पना जैन दमोह और छोटे भ्राता आलोक जैन श्री जी रामपुरा में निवासरत हैं
जैन समाज ने इस घटना को अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक बताते हुए प्रशासन से दोषी वाहन चालक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है तथा संतों-साध्वियों की सुरक्षा हेतु विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।






