अजमेर (विश्व परिवार)। अजमेर के जवाहर रंगमंच में आयोजित भव्य सर्वधर्म सम्मेलन **“मेरा मुल्क, मेरी पहचान”** में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा विद्वान, कवि एवं जैन धर्म के ओजस्वी वक्ता **हृदय विकर्ष शास्त्री** ने जैन समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने प्रभावशाली एवं चिंतनशील वक्तव्य से उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न धर्मों एवं समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विश्व शांति, राष्ट्रीय एकता तथा सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। इस अवसर पर हृदय विकर्ष शास्त्री ने जैन धर्म के मूल सिद्धांत **अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और “जियो और जीने दो”** के सार्वभौमिक संदेश को अत्यंत प्रभावी, ओजस्वी एवं तार्किक शैली में प्रस्तुत किया।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक एकता में निहित है। जैन दर्शन का अनेकांतवाद विश्व को संवाद, समन्वय और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का मार्ग प्रदान करता है। उनके उद्बोधन ने उपस्थित सभी धर्मगुरुओं, बुद्धिजीवियों और श्रोताओं पर गहरी एवं अमिट छाप छोड़ी।
हृदय विकर्ष शास्त्री के उत्कृष्ट योगदान और जैन धर्म के प्रभावशाली प्रतिनिधित्व के लिए आयोजक संस्था **All India Sufi Sajjadanashin Council** द्वारा उन्हें विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया। परिषद के पदाधिकारियों ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित करते हुए उनके विद्वत्तापूर्ण योगदान की सराहना की।
यह कार्यक्रम “अजमेर की पावन धरती से विश्व को शांति का संदेश” देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, जिसमें सर्वधर्म एकता, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया।
कवि हृदय विकर्ष शास्त्री का यह प्रेरक वक्तव्य कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रहा और उन्होंने जैन समाज की ओर से राष्ट्रीय एकता, मानवता और विश्व शांति का सशक्त संदेश देकर सभी का हृदय जीत लिया।






