गरियाबंदछत्तीसगढ़

गरियाबंद में मिला दुर्लभ पैंगोलिन, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू

गरियाबंद (विश्व परिवार)। जिले के बजाड़ी गांव में एक दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन (खालखपरी) मिलने से वन विभाग में सक्रियता बढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्र में मिले इस दुर्लभ जीव की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर अपने संरक्षण में ले लिया। जानकारी के अनुसार, बजाड़ी गांव में पैंगोलिन दिखाई देने की सूचना जनपद सदस्य सुभाष यादव द्वारा वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला तत्काल सक्रिय हुआ और मौके पर पहुंचकर वन्यजीव को सुरक्षित बचाने की कार्रवाई शुरू की।
बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम ने रात्रि गश्त के दौरान पैंगोलिन को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। पूरी कार्रवाई वन परिक्षेत्र अधिकारी अश्वनी दास के नेतृत्व में की गई। टीम ने सावधानी बरतते हुए पैंगोलिन को किसी प्रकार की चोट पहुंचाए बिना अपने संरक्षण में लिया। पैंगोलिन को वन्यजीवों की दुर्लभ प्रजातियों में शामिल किया जाता है। इसके शरीर पर मौजूद मजबूत शल्क (कवच जैसी परत) इसे अन्य जीवों से अलग बनाती है। यह जीव मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों को खाकर अपना जीवन यापन करता है। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से पैंगोलिन का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पैंगोलिन जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यदि कोई वन्यजीव दिखाई देता है तो लोगों को उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि जंगल या आसपास के क्षेत्रों में किसी भी दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी की जानकारी तुरंत विभाग को दें। समय पर सूचना मिलने से वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया जा सकता है और उन्हें उचित स्थान पर छोड़ा जा सकता है। गरियाबंद वन विभाग द्वारा लगातार वन क्षेत्रों में गश्त और निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पैंगोलिन के रेस्क्यू के बाद वन विभाग द्वारा आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वन्यजीव की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक देखरेख के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने की कार्रवाई की जाएगी।

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