(विश्व परिवार)। देशभर में आयोजित होने वाले धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों में आज एक युवा नाम तेजी से अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है—**कवि हृदय विकर्ष शास्त्री**। अपनी ओजस्वी वाणी, प्रभावशाली मंच संचालन, प्रखर वक्तृत्व और जिनशासन के प्रति समर्पण के कारण वे देश के प्रतिष्ठित मंचों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे कवि हृदय विकर्ष शास्त्री ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और अनुशासित व्यक्तित्व के बल पर देश के अनेक बड़े धार्मिक आयोजनों में सफल मंच संचालन एवं निर्देशन का दायित्व निभाया है। उनकी सहज प्रस्तुति, प्रभावशाली भाषा और श्रोताओं से आत्मीय संवाद की शैली ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई है।
हाल ही में मुंबई महानगर में आयोजित भव्य मंगल कलश स्थापना महोत्सव में उनके उत्कृष्ट मंच संचालन एवं निर्देशन की व्यापक सराहना हुई। इस अवसर पर उनका सार्वजनिक रूप से सम्मान एवं बहुमान भी किया गया। उपस्थित संतजनों, आयोजकों एवं श्रद्धालुओं ने उनकी प्रतिभा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
दिल्ली, मुंबई, गुवाहाटी, दीमापुर सहित देश के अनेक प्रमुख महानगरों में आयोजित कार्यक्रमों में कवि हृदय विकर्ष शास्त्री अपनी ओजस्वी वाणी से जिनशासन की प्रभावना कर रहे हैं। एक युवा विद्वान, कुशल मंच संचालक और प्रेरक वक्ता के रूप में वे समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभर रहे हैं।
उनकी यह निरंतर बढ़ती राष्ट्रीय पहचान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि जैन समाज के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। समाज को विश्वास है कि कवि हृदय विकर्ष शास्त्री अपनी प्रतिभा, विनम्रता और समर्पण के साथ भविष्य में भी जिनशासन की प्रभावना का यह अभियान निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।







