नई दिल्ली (विश्व परिवार)। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर और खुद को कथित छात्र नेता कहने वाले अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) पर करारा निशाना साधा है। न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए इंटरव्यू में किरण रिजिजू ने अभिजीत दीपके की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी यानी आप (AAP) का कार्यकर्ता है। वो छात्र नेता कैसे बन गए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज के सीजेपी (CJP) के आरोप पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि एक भी लाठी नहीं चली और न ही किसी की हड्डी टूटी है। इंटरव्यू में ने किरण रिजिजू ने जेन-जी आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन, अभिजीत दीपके, राहुल गांधी और कांग्रेस पर बयान दिए।
नीट पेपर लीक पर जेन-जी के आंदोलन पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने कहा कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। उनसे बातचीत करने में सरकार की तरफ से कोई कमी नहीं है। रिजिजू ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के प्रदर्शन के बावजूद एक भी गोली नहीं चली और किसी प्रदर्शनकारी को गंभीर चोट नहीं लगी।
रिजिजू ने जेन-जी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले CJP फाउंडर अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए कहा- दीपके महाराष्ट्र से हैं, लेकिन वे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वे छात्र कैसे बन गए? अभिजीत दीपके छात्रों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं। रिजिजू ने कहा- जेन-जी बच्चों से कनेक्शन में कोई कमी नहीं है। वे हमारे अपने बच्चे हैं। हमें उनकी बात सुननी होगी और उन्हें अपनी बात भी समझानी होगी। अगर उन्हें लगातार सिर्फ मांगें करने के लिए उकसाया जाता रहेगा तो दूरी कम करने में समय लगेगा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बोले- किसी की हड्डी नहीं टूटी, जान नहीं गई
जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन पर पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने कहा- एक भी इंसान को चोट नहीं आई; एक भी इंसान की हड्डी नहीं टूटी। एक भी प्रोटेस्टर गंभीर चोट के साथ हॉस्पिटल में नहीं है। इस आंदोलन के बड़े लेवल पर सोचिए—हजारों लोग आए, और इतने सारे क्रिमिनल्स स्टूडेंट्स के भेष में घुस आए। इसके अलावा, आधे से ज़्यादा लोग—चाहे आम आदमी पार्टी से हों, डफली बजाने वाले आंदोलनकारी हों, भीम आर्मी से हों, या समाजवादी पार्टी से—आए और दूसरों को हिंसा के लिए उकसाया; फिर भी, एक भी कैजुअल्टी नहीं हुई। अगर ऐसा कोई आंदोलन कांग्रेस के ज़माने में हुआ होता—और कई लोगों ने किया, जिससे हज़ारों मौतें हुईं, तो दिल्ली पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन की तारीफ़ होनी चाहिए कि उन्होंने इतने बड़े प्रोटेस्ट को बिना किसी को गंभीर चोट लगने दिए हैंडल किया। कांग्रेस के ज़माने में असल में हज़ारों लोग गोलियों से मारे गए। प्रोटेस्ट के दौरान, दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन ने एक भी लाठी का इस्तेमाल नहीं किया; उन्हें तभी रोका गया जब वे ज़बरदस्ती पार्लियामेंट की ओर मार्च कर रहे थे। कोई मौत नहीं हुई। पुलिस की तारीफ़ होनी चाहिए।
राहुल गांधी खुद हंसी का पात्र बने
नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा-राहुल गांधी ने नाटकीय तरीके से प्रधानमंत्री का मज़ाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन आखिर में वह सिर्फ़ अपना मज़ाक बनवाने में कामयाब रहे। उन्होंने अपने ही चरित्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है; इससे उबरना मुश्किल होगा। रिजिजू ने कहा- राहुल गांधी सदन के अंदर जैसा व्यवहार करते हैं, क्या वे नेता प्रतिपक्ष जैसे दिखाई देते हैं? मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। हम मिलते हैं, बातचीत करते हैं। लेकिन नेता प्रतिपक्ष को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए काम करना चाहिए और उसी हिसाब से सदन में बोलना चाहिए।







