रायपुर (विश्व परिवार)। बिरगांव निगम के पार्षद इकराम अहमद ने बताया की नवा रायपुर के ब्लू वाटर में हुए दर्दनाक हादसे में मौदहापारा निवासी आदिल के परिवार से मुलाकात कर ₹4 लाख की आर्थिक सहायता का चेक सौंपने की तस्वीरें सामने आई हैं। दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ संवेदना और सहयोग का स्वागत है, लेकिन सरकारी नियम के तहत मिलने वाली सहायता राशि को किसी की निजी कृपा या विधायक की व्यक्तिगत मदद के रूप में पेश करना जनता को गुमराह करना है।
मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह ₹4 लाख किसी के निजी पैसे से नहीं, बल्कि शासन के निर्धारित नियमों के तहत तालाब में डूबने से मृत्यु होने पर मिलने वाली सहायता राशि है। इसमें विधायक जी की व्यक्तिगत निधि से कोई योगदान नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आदिल का परिवार चार दिनों तक अपने बेटे के शव की तलाश में दर्द और बेबसी के दौर से गुजर रहा था, तब विधायक जी कहां थे? परिवार उस समय मदद और संवेदना की उम्मीद कर रहा था। लेकिन जैसे ही शव बरामद हुआ और सरकारी प्रक्रिया के तहत सहायता राशि तैयार हुई, तब चेक हाथ में लेकर फोटो खिंचवाने और श्रेय लेने की जल्दबाजी क्यों?
मेरी जानकारी के अनुसार आज सुबह 10 बजे नियमों के तहत तहसीलदार के माध्यम से ₹4 लाख की सहायता राशि का चेक तैयार करा दिया गया था। इसके बाद चेक सौंपने की पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक प्रचार और फोटो सेशन में बदल देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
अगर विधायक जी को वास्तव में आदिल के परिवार की मदद करनी थी, तो सरकारी ₹4 लाख की राशि का श्रेय लेने के बजाय अपनी विधायक निधि से ₹10 लाख की अतिरिक्त सहायता देकर एक मिसाल कायम करते। तब जनता भी कहती कि विधायक जी ने संकट की घड़ी में परिवार का हाथ थामा है।
दुख की घड़ी में राजनीति नहीं, इंसानियत चाहिए।
सरकारी सहायता पर अपना नाम लिखवाकर वाहवाही लूटना सेवा नहीं है।
चार दिन तक परिवार के दर्द में साथ खड़े होना ही सच्ची जनसेवा है।







