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जनता को जीडीपी समझ नहीं आती , वो तो बस शक्कर तेल गैस परचून के दाम कम चाहती है

  • पेट्रोल डीज़ल गैस के रेट कब कम होंगे मोदीजी जनता महँगाई से पीस रही

(विश्व परिवार) जनता को जीडीपी समझ नहीं आती ,वो तो बस शक्कर , तेल , प्याज , गैस , पैट्रोल , परचून , दैनिक उपयोगी वस्तुओं के दाम कम चाहती है , बेतहाशा बढ़ती महंगाई से त्रस्त जनता की ओर से जैन संवेदना ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है । जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने कहा कि रोजमर्रा के बुनियादी उपयोग की वस्तुओं के दाम आसमान छूने से काफी ऊपर निकल गए हैं , चाय समोसा से पेट भरना दूभर हो गया है , शक्कर , तेल , गैस , टमाटर , मिर्ची , अदरक , धनिया इत्यादि के दाम ज्यादा महंगे हो गए हैं । केन्द्र सरकार द्वारा जी डी पी व थोक सूचकांक से महंगाई में कमी के आंकड़े प्रस्तुत किये जाते हैं । लेकिन धरातल पर जनता को दैनिक उपयोग की सामग्री अत्यधिक महंगे दामों पर लेना जनता की मजबूरी हो गई है । केन्द्र सरकार द्वारा जी डी पी व थोक सूचकांक से महंगाई में कमी के आंकड़े प्रस्तुत किये जाते हैं । मोदी जी जनता को जी डी पी व थोक सूचकांक समझ नही आते हैं उसे तो शक्कर तेल गैस दाल चांवल परचून व सब्जी भाजी के दाम कम चाहिए जिनके भाव आसमान छू रहे हैं , देश में रिकार्ड तोड़ महंगाई है , जिस पर आपकी सरकार का कोई नियंत्रण नही है , धरातल पर जनता को दैनिक उपयोग की सामग्री अत्यधिक महंगे दामों पर लेना जनता की मजबूरी हो गई है । महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पूछा कि पेट्रोल डीज़ल गैस के दाम कब कम होंगे , पेट्रोल डीज़ल ही महंगाई की जड़ है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में कमी व सबसे निचले स्तर पर होने के बावजूद पेट्रोल डीज़ल के दाम पिछले एक साल से जस के तस स्थिर हैं जिससे ट्रांसपोर्ट व्यय महंगा पड़ रहा है । जबकि केन्द्र सरकार चाहती तो दाम कम कर सकती थी जिससे महंगाई व मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण किया जा सकता है । महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने आगे कहा कि खाद्यान्न के दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं , शक्कर गेंहू , चावल , दाल , मिर्च मसाला के मूल्यों पर सरकार का कोई ध्यान नही है , हर माह के साथ किचन का बजट बढ़ रहा है , और थैले में सामग्री कम होते जा रही है , गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार भारी मुसीबत झेल रहे हैं । जीना दूभर हो गया है । कोचर व चोपड़ा ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में मसाले 26 प्रतिशत महंगे हुए हैं । शक्कर 38℅ से 43% , दालें 12℅ , विभिन्न अनाज में 16% , चाँवल में 25% , दूध में 20 % , उड़द दाल में 20% , धी में 32 % , आटा 19% दामों की वृद्धि सामने आई है । केन्द्र सरकार पेट्रोल डीज़ल की कीमतों को कच्चे तेल के मूल्यों के आधार पर नियंत्रित कर उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में कमी ला सकती है ।

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