डोंगरगढ़ (विश्व परिवार)। शहर के सरस्वती शिशु मंदिर रोड स्थित कुम्हारपारा में गुरुवार देर रात दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई. इस घटना में कई लोग घायल हो गए. एक युवक को गंभीर चोटें आने के बाद राजनांदगांव रेफर किया गया है. हमले में चाकू, बेसबॉल बैट और डंडों का इस्तेमाल किया गया. शुरुआती विवाद नवरात्र मेले के आखिरी दिन झूला झूलने को लेकर हुआ था, लेकिन अब इस मामले में राजनीतिक पदों से जुड़े लोगों के नाम सामने आने और सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है।
वायरल वीडियो में बीजेपी नेता के दिखने का दावा
घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि इसमें भाजपा डोंगरगढ़ के पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष सुमित मिश्रा स्थानीय लोगों के साथ विवाद करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, वीडियो की पूरी परिस्थितियों और मारपीट में उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि विवाद के दौरान क्या हुआ और घटना में किसकी क्या भूमिका रही।
बातचीत के लिए पहुंचे थे, फिर शुरू हुई मारपीट
स्थानीय निवासी मनोज कुंभकार का आरोप है कि वह अपने भतीजे को पीटते देखकर बीच-बचाव करने पहुंचे थे. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उनके साथ अभद्रता और बेसबॉल बैट से हाथ पर वार किया गया. मनोज के मुताबिक, विवाद के दौरान कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक पद और पहचान का हवाला भी दिया. वहीं, शांति बाई कुंभकार ने बताया कि कुछ लोग विवाद सुलझाने के लिए मोहल्ले में आए थे, लेकिन उनके साथ आए युवकों ने अचानक मारपीट शुरू कर दी. उनका आरोप है कि हमलावरों ने चेहरे ढक रखे थे और चाकू से भी वार किए. शांति बाई ने अपने परिवार के एक युवक को 5 से 6 चाकू लगने की बात कही है. हालांकि, चोटों की वास्तविक स्थिति की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से होना बाकी है।
देवेंद्र उर्फ देव वर्मा का नाम भी आया सामने
इस मामले में देवेंद्र उर्फ देव वर्मा का नाम भी सामने आया है. जानकारी के अनुसार, देव वर्मा को भाजपा मुसरा-मुरमुंदा मंडल में युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष बताया जा रहा है. यह भी दावा किया जा रहा है कि पहले वह भाजपा में अलग-अलग पदों पर रह चुका है. हालांकि, उसके वर्तमान पद की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. इसके अलावा देव वर्मा के खिलाफ अलग-अलग थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज होने का दावा भी किया जा रहा है. इन मामलों की संख्या, प्रकृति और वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि इस घटना में उसकी क्या भूमिका रही और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है. किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से मामला दर्ज होना अपने आप में उसे इस घटना का दोषी साबित नहीं करता।
पुलिस ने दर्ज की FIR दर्ज
एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि नवरात्र मेले के आखिरी दिन हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए. दोनों तरफ के कई लोग घायल हुए हैं. पुलिस के मुताबिक, कुंभकार पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. मामले में हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 307, बलवा और आर्म्स एक्ट सहित संबंधित धाराएं लगाए जाने की जानकारी दी गई है. एसडीओपी ने बताया कि दूसरे पक्ष के भार्गव, मनीष कुमार वर्मा और सुमित मिश्रा भी घायल हुए हैं. उनके पक्ष के लोग इलाज के लिए रेफर होने के कारण उस समय थाने में शिकायत दर्ज कराने नहीं पहुंचे थे. पुलिस ने उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए सूचित किया है. एसडीओपी के अनुसार, देवेंद्र वर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा।
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवरात्र मेले के दौरान शुरू हुआ विवाद आखिर इतनी बड़ी मारपीट में कैसे बदल गया? वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम की जांच कैसे होगी? दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं? और जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका के आधार पर कार्रवाई की जाएगी या नहीं? फिलहाल, पुलिस ने एक पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की है और दूसरे पक्ष की शिकायत का इंतजार किया जा रहा था. ऐसे में पुलिस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी. राजनीतिक पहचान या रसूख के आरोपों से अलग, जांच में सभी संबंधित लोगों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों को निष्पक्ष तरीके से परखना जरूरी है. अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करती है।







