- देशभर के लगभग 80 जनजातीय कारीगरों की सहभागिता के साथ लगाए जाएंगे करीब 40 स्टॉल
- छत्तीसगढ़ के कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में करेंगे शुभारंभ
रायपुर (विश्व परिवार)। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राईफेड) के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा 24 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक टाउन हॉल, कलेक्ट्रेट परिसर, घड़ी चौक के पास, रायपुर, छत्तीसगढ़ में एक भव्य राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव “आदि बाजार 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय कारीगरों को अपने प्रामाणिक हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक प्रत्यक्ष विपणन मंच प्रदान करते हुए भारत की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और विविध आजीविका प्रथाओं को बढ़ावा देना है।
आदि बाजार 2026 का उद्घाटन समारोह छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में प्रस्तावित है। इस अवसर पर रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज सहकारी संघ लिमिटेड की प्रबंध निदेशक एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) श्रीमती संजीता गुप्ता (IFS) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
10 दिवसीय इस प्रदर्शनी सह बिक्री मेले में भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 80 जनजातीय कारीगरों और शिल्पकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। आगंतुकों को पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, वस्त्र, पारंपरिक आभूषण, पेंटिंग और प्राकृतिक व जैविक उत्पादों की सीधी खरीदारी का अवसर मिलेगा। प्रमुख क्षेत्रीय शिल्प आकर्षणों में छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क एवं ढोकरा क्राफ्ट; ओडिशा की संबलपुरी साड़ी एवं सौरा पेंटिंग; मध्य प्रदेश की बाघ-प्रिंट साड़ी, माहेश्वरी साड़ी एवं गोंड पेंटिंग; पश्चिम बंगाल की कांता-कढ़ाई साड़ी एवं पारंपरिक आभूषण; राजस्थान का पारंपरिक वस्त्र एवं आभूषण; झारखंड का जूट उत्पाद एवं जनजातीय आभूषण; पूर्वोत्तर राज्यों के बेत एवं बांस शिल्प; उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के बांस उत्पाद; तथा अराकु कॉफी सहित अन्य विशिष्ट हस्तशिल्प शामिल हैं।
जनजातीय शिल्पकारों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संपर्क को सुगम बनाकर, आदि बाजार का उद्देश्य बिचौलियों पर निर्भरता को कम करना, उत्पादों की दृश्यता बढ़ाना, जनजातीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। ट्राईफेड आम जनता से अपील करता है कि 24 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक टाउन हॉल, कलेक्ट्रेट परिसर, रायपुर पहुंचकर जनजातीय कारीगरों का उत्साहवर्धन करें और भारत की समृद्ध जनजातीय कला व संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान दें।






